कई सीटिंग विधायकों के सिंहासन पर ‘संकट’

जनमंच टुडे/ देहरादून।
भाजपा प्रत्याशियों के चयन को लेकर फूंक, फूंक कर कदम बढ़ा रही है और वह हर हाल में जीताऊ प्रत्याशी को चुनावी रण में उतारना चाहती है और प्रत्याशी चयन को लेकर कोई हड़बड़ी नहीं करना चाहती है। भाजपा में प्रत्याशियों के चयन को लेकर शनिवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में भाजपा कोर ग्रुप और प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई।बैठक में विधानसभा चुनाव को लेकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। टिकटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी पिछले काफी समय से मंथन कर रही है। इसे लेकर ब्लॉक स्तर, जिला स्तर पर भी बैठक आयोजित की गई। आज प्रदेश मुख्यालय में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में तमाम बिंदुओं पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन किया और अब रविवार को दिल्ली में होने वाले केंद्रीय चुनाव कमेटी की बैठक में प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा । चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी ने कहा कि बैठक में चुनाव को लेकर 14 फरवरी तक की रणनीति तय की गई है। जोशी ने कहा कि चुनाव प्रचार अभियान को किस तरह से गति देना है, वर्चुअल रैलियों को कैसे आयोजित करना है, और पार्टी के प्रत्याशी अपने-अपने विधानसभाओं में जनता से कैसे अपने पक्ष में वोट की अपील करेंगे इन सभी विषयों पर भी रणनीति तैयार की गई। वहीं बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खटीमा से ही चुनाव लड़ेंगे। बैठकों के बाद सभी सीटों पर तीन-तीन नामों का पैनल बनाया गया है। वही जानकारी के अनुसार, इस बार पार्टी 15 से 20 सिटिंग विधायकों के टिकट काट सकती है। इसके लिए ज्यादातर नॉन परफॉर्मेंस और एन्टी इनकंबेंसी वाले फेक्टर को मुख्य कारण बनाया गया है। ऐसे में कई विधायकों की धड़कनें बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार परफार्मेंस के आधार पर गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल के कम से कम 15 से 20 विधायकों के टिकटों पर पेंच फँसकता है। भाजपा इस बार जिन विधायकों का परफॉर्मेंस बेहतर नहीं है, उनके स्थान पर नए जीताऊ प्रत्यशियों को मैदान में उतारकर हर हाल में सीट को हाथ से फिसलना नहीं देना चाहती और सीट को अपने कब्जे में ही रखना चाहती है। वही विधायक हरक सिंह रावत आज दोपहर को दिल्ली से देहरादून लौटे। उन्होंने कहा कि उन्हें कोर कमेटी की बैठक को लेकर कोई सूचना नहीं दी गई थी जिसके चलते वह बैठक में शामिल नहीं हो सके।