जब अपनों ने मोड़ा मुंह, पुलिस बनी देवदूत

जनमंच टुडे/ऋषिकेश।
देवभूमि में मानवता को शर्मसार करने वाला एक घटना तीर्थ नगरी में घटित हुई है। ऋषिकेश के हरिधाम कॉलोनी स्थित गली नंबर-1 निवासी बुजुर्ग संतोष (80) और उनके बेटे मनीष जैन (56) की तबीयत बिगड़ गई, तो अपनों ने उनसे मुँह मोड़ लिया। बुजुर्ग महिला और उसके बेटे की तबियत खराब थी। अचानक आज उन दोनों की हालत बिगड़ गई तो। मामले की सूचना बुजुर्ग के अपनों को और उनके बेटों सगे सम्बन्धियों को दी गई, लेकिन किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली। आस पड़ोस के लोगों ने भी रही सही कसर पूरी कर दी। उन्होंने ने भी पड़ोसी धर्म नही निभाया और उनको अस्पताल पहुंचाने के बजाय उनसे मुंह मोड़ लिया और उनको उनकी हालत पर छोड़ दिया। किसी ने मामले की सूचना पुलिस को दी तो पुलिस उनके लिए देवदूत बनकर उनके घर पहुँची और मां बेटे को अस्पताल पहुँचाकर मानवधर्म तो निभाया ही साथ मित्र पुलिस की भूमिका को भी साकार किया। कोरोना ने अपनों को भी अपनों से दूर कर दिया है और फासलों को इस कदर बढ़ा दिया है कि इंसान मानवता भी भूल गया है। तीर्थ नगरी में भी जब एक बुजुर्ग महिला और उसका बेटा बीमार हुए तो उनको अस्पताल पहुंचाने के बजाए उनको उनके हालात पर छोड़ दिया। जिस महिला ने बेटों को पालपोष कर बड़ा किया। उन्होंने तक उसकी सुध नही ली। पड़ोसियों और सगे सम्बन्धियों ने भी मुँह मोड लिया कोई मदद के लिए नहीं आए। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसी बीच कालोनी के किसी भले मानस ने पुलिस को मामले की खबर दी। सूचना मिलते ही पुलिस देवदूत बनकर बुजुर्ग महिला और उसके बेटे के घर पहुंची। उनकी हालत खराब थी, उनको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। पुलिस ने उनको आपातकालीन सेवा से एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया। जहां जांच में बुजुर्ग महिला कोरोना पॉजिटिव पायी गई , जबकि बेटे की रिपोर्ट निगेटिव आई है। डॉक्टरों ने दोनों को तुरंत ऑक्सीजन लगवाई। कोतवाल रितेश शाह के मुताबिक फिलहाल दोनों की हालत स्थिर है। ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए उन्हें तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराकर ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल मां और बेटे की हालत स्थिर है। मनीष के दो भाई दिल्ली रहते हैं।
- प्रीति नेगी।