मातृशक्ति के लिए नजीर बनी राधिका केदारखण्डी

जनमंच टुडे/ऊखीमठ।

रुद्रप्रयाग जनपद की जलेई ग्राम सभा की सुदुर उतुंगवादियों में बाँज, बुराँश काफल आदि घनी वनस्पतियों के बीच में नागेश्वर शिवालय अवस्थित है। इस पावन धाम में माँ नन्दा राज राजेश्वरी व भगवान भोलेनाथ का स्वयम्भू लिंग है। मन्दिर के ठीक पहाड़ी के नीचे नागेश्वरी गंगा के उद्गम स्थल पर स्थित है। इस पौराणिक गंगा का वर्णन केदारखण्ड में भी मिलता है। जंगल में अवस्थित होने के कारण यहाँ पर वनदेवी- ऐड़ी आछरी व भूमियाळ देवता को इष्टदेव मानकर पूजन अर्चन किया जाता है। इस पवित्र तीर्थ के पहले महन्त “स्वामी नन्द ब्रह्मचारी” थे। 11 फरवरी 1998 की रात्रि को स्वामी नन्द ब्रह्मचारी ने महाप्रयाण लेते वक्त हरिशंकर को वचनवद्ध किया था कि अब आप इस कुटिया को सम्भालेंगे व मन्दिर की पूजा अर्चना के लिए कृत संकल्प होंगे। तदुपरान्त उन्होंने महाप्रयाण किया। उन महान सन्त की समाधि इसी स्थान पर बनी हुई है। तदुपरान्त हरिशंकर गोस्वामी ने 2000 में रूद्रप्रयाग के कोटेश्वर महादेव के महन्त 108 शिवानन्द गिरी महाराज से 31 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की और महन्त के प्रथम शिष्य बन गये। जिसके बाद उनको हरिहरानन्द गिरी महाराज के नाम से सुशोभित किया। इसके साथ ही उन्होंने अपना घर और संसारिक मोह माया को त्याग दिया। आज वे इस पवित्र तीर्थ पर भगवान नागेश्वर व माँ नन्दा देवी के पुजारी के रूप में सन्त को दिया वचन निभाते हुए आश्रम की व्यवस्था को देख रहे हैं। इन्हीं की सुपुत्री हम सबकी गौरव, नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत राधिका(प्रियंका) केदारखण्डी हैं।

महन्त शिव स्वरूप हरिशंकर गोस्वामी की सुपुत्री ठेठ गढ़वाली संस्कृति में पली-बढ़ी सुश्री राधिका (केदारखण्डी) का जन्म 17 जनवरी 1994 को रूद्रप्रयाग जिले केग्राम-जलई-सुरसाल के एक छोटे से गाँव “सदेला” की पवित्र गौशाला में हुआ।राधिका केदारखण्डी की प्रारम्भिक शिक्षा 1998 में सरस्वती शिशु मन्दिर कण्डारा से हुई। इसके बाद 2012 में राधिका केदारखण्डी ने 12 वीं की शिक्षा राजकीय इण्टर कॉलेज कण्डारा से उत्तीर्ण कर वर्ष 2017 में रा० स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि से संस्कृत में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई-लिखाई के साथ – साथ राधिका केदारखण्डी , पिताजी की प्ररेणा से श्रीमद्भागवत, श्रीरामचरितमानस आदि धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन भी करती रहीं। अपनी माता रामेश्वरी देवी के साथ घरेलू कार्यों में भी हाथ बँटाती रहीं, जिस कारण वह घरेलू कार्यों में भी दक्ष हैं। राधिका केदारखण्डी अपनी जिजीविषा, मेहनत एवं लगन के बल पर आज मातृशक्ति के लिए एक नजीर बन गयीं हैं। गोस्वामी रंग मंच से जुड़े हुए  हैं। गीत, संगीत एवं अभिनय में  उनकी बचपन से ही रुचि थी। राधिका केदारखण्डी के पिता ने मुम्बई के गोरेगांव से लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर से संगीत की शिक्षा प्राप्त की।

बचपन से ही परिवार में संगीत और भजन के माहौल के कारण राधिका केदारखण्डी और उनके दोनों भाइयों का रूझान संगीत की तरफ होने लगा। राधिका केदारखण्डी और उनके भाइयों ने अपने पिता से ही संगीत की शिक्षा ग्रहण की। जिसका प्रतिबिम्बित आपके तीनों बच्चों में स्पष्ट झलकता है। आज तीनों बच्चे नयी पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन गये हैं। अपने गायन वादन के माध्यम से जनता के दिलों में राज कर रहे हैं। राधिका केदारखण्डी को पहली शिवपुराण कथा में संगीत और भजन का कार्यक्रम ब्रदीनाथ में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज के सानिध्य में मिला तब राधिका केदारखण्डी की उम्र महज 7 साल थी। श्री नागेश्वर भजन संध्या एवं कोटेश्वर महादेव साउण्ड के बैनर तले  उत्तराखण्ड सहित अन्य प्रदेशों में भी भजन व कीर्तनों के माध्यम से भक्तों के दिलों से सीधे जुड़ गई हैं। राधिका केदारखण्डी ने अपना पहला प्रवचन 16 वर्ष की उम्र में एक दिवसीय गौमाता की महिमा पर ग्राम सुरसाल में दिया था। ग्राम सुरसाल से ही राधिका को ब्यासपीठ की प्राप्ति हुई ! राधिका केदारखण्डी के मुखारविन्द से गौमाता की अद्वितीय दिव्य महिमा को सुनते-2 अनायास ही अभिभूत होकर राधिका केदारखण्डी के पिता के श्रीमुख से आपको “पूज्या राधिका केदारखण्डी” की संज्ञा उच्चारित हो गयी। यह एक सन्त की वाणी से निकला हुआ सम्मान सूचक शब्द था। जिस कारण कालान्तर में राधिका राधिका केदारखण्डी के नाम से प्रसिद्ध हो गयीं। राधिका केदारखण्डी के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वर्ष 2013 में राधिका केदारखण्डी को रूद्रप्रयाग में गोपाल गोलोक धाम में पूज्य गोपालमणि महाराज के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। महाराज का आशीर्वाद मिला, गौमाता के प्रति श्रद्धा और प्रभु की कथाओं एवं गौकथा के प्रति रूझान को देखकर महाराज ने उचित मार्गदर्शन किया। आगे चलकर राधिका केदारखण्डी ने अनेक सन्तों के सानिध्य में बड़े-बड़े मंचों में अनेक गौ कथायें तुलसीकृश्रीरामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण का पाठ किया। जिसका कई चैनलों पर प्रसारण भी किया गया। अभी तक राधिका केदारखण्डी कई गौ कथाएं और श्रीरामकथा कर चुकी हैं।

राधिका केदारखण्डी की कथायें, प्रवचन एवं भजन का प्रसारण सामुदायिक रेडियो 90.8 एफएम “मंदाकिनी की आवाज”, आध्यात्म टीवी चैनल, बाबा प्रोडेक्शन यूट्यूब चैनल एवं स्वयं का धेनू वर्षा यूट्यूब चैनल पर भी किया जाता है। राधिका केदारखण्डी की बुद्धि, पाण्डित्य व सामाजिक सहभागिता से प्रभावित होकर “मंदाकिनी की आवाज कल्याण सेवा समिति” के द्वारा एवं “नन्दा देवी कौथिग” आदि के द्वारा सम्मानित किया गया है। तीनों बच्चों में सबसे छोटी राधिका केदारखण्डी अपने दिव्य ज्ञान से समाज को एक नई दिशा व दशा देने का प्रयास कर रही हैं। अपनी बुद्धि और पाण्डित्य के बल से वृन्दावन जैसे पावन धाम में व्यासपीठ से श्री राम कथा की दिव्य प्रस्तुति देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। राधिका केदारखण्डी ने  छोटी सी उम्र में ही दिव्य गौ कथा, श्रीमदभागवत कथा व दिव्य श्री राम कथा की व्यासपीठ से  मधुर वाणी से प्रस्तुति देकर यह साबित कर दिया है कि पहाड़ की बेटियाँ भी ज्ञान व कौशल में कम नहीं हैं। राधिका केदारखण्डी महज जब 5-6वर्ष की थी तो हमारे गाँव में श्री रामलीला मंचन के दौरान अपने पिताजी व भाइयों के साथ भजन व कीर्तनों की दिव्य प्रस्तुतियाँ देती थीं। तभी आपके भविष्य का अंदाज लग जाता था कि ये बिटिया निश्चित ही एक दिन बहुत बड़ा दायित्व निभाने वाली है। अपने ज्ञान, कौशल, संस्कारों के माध्यम से  राधिका भारतीय संस्कृति व परम्पराओं का संरक्षण व संवर्द्धन करते हुए समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रही हैं। बहू-बेटियों के लिए आपका व्यक्तित्व अनुकरणीय है।

स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा 
राधिका केदारखण्डी कथाओं के साथ-साथ गौमाता के गोबर और हिमालय की अलग-अलग जड़ी-बूटियों को मिलाकर शुद्ध प्राकृतिक धूप भी तैयार करती हैं। जिसका नाम धेनु वर्षा रखा गया है। अभी राधिका केदारखण्डी गोबर से अन्य वस्तुएँ बनाने के प्रयास में लगी हुई हैं। कुछ शोध कर उन्होंने गोबर से दिया, गोबर गणेश, गोबर से राखियाँ, गोबर से समिधा/लकड़ी, गोबर से माला, गोबर से मूर्तियाँ आदि तैयार कर रही हैं।

धेनु वर्षा के नाम पर ही राधिका केदारखण्डी का अब स्वयं का यूट्यूब चैनल भी है। जिसके माध्यम से लाइव कथाओं का प्रसारण किया जाता है। राधिका केदारखण्डी के सलाहकार नवीन जोशी हैं।  पैलिंग गाँव के शिक्षाविद माधव सिंह नेगी ने बताया किराधिका केदारखण्डी का मुख्य उद्देश्य है कि देवभूमि उत्तराखण्ड की महिमा, धार्मिक स्थलों व संस्कृति के विषय में पूरे विश्व में प्रचार-प्रसार करना है ।

  • लक्ष्मण सिंह नेगी, वरिष्ठ पत्रकार।

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