पत्रकारों की सुध ले सरकार : डीपीएस रावत

जनमंच टुडे / कोटद्वार/ सतपुली।
पौड़ी लोकसभा सीट के पूर्व सांसद प्रत्याशी व वरिष्ठ समाजसेवी इ. डीपीएस रावत ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर पत्रकारों की सहायता करने की मांग की है। मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में रावत ने कहा कि प्रदेश के पत्रकार कोरोना काल में सरकार की योजनाओं, सूचनाओं को आमजन तक पहुँचा रहे हैं, साथ ही प्रदेश अपनी जान जोखिम में डालकर सूचनाएं एकत्र करने के लिए घरों से बाहर निकल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार फील्ड में हैं, तभी लोगों को हर सूचनाएं मिल रही है। उसके बावजूद सरकार पत्रकारों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। छोटे व मझोले पत्र पत्रिकाओं के पत्रकार परेशानियों व आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, सरकार को ऐसे संकट की घड़ी में उनकी मदद को आगे आना चाहिए और उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए। रावत ने कहा कि एक ओर तो सरकार बड़े, बड़े मीडिया घरानों के अखबारों और टीवी चैनलों को लाखों करोड़ों का विज्ञापन दे रही है, जबकि छोटे अखबारों, वेबपोर्टल वालों की सुध तक नहीं ली जा रही है। वेबपोर्टल व छोटे पत्र पत्रिकाओं के पत्रकार गल्ली, मोहल्ले में घूम,घूम कर इकठाआम जनता व सरकार तक खबर पहुँचा रहे उनको सरकार के तरफ से क्या मिल रहा है। जबकि बड़े, बड़े मीडिया घरानों के अखबारों और टीवी चैनलों को सरकार लाखों करोड़ों का विज्ञापन दे रही। सरकार द्वारा किया जा रहा यह भेदभाव गलत है। सरकार के इस भेदभाव पूर्ण नीति के चलते वेबपोर्टल व छोटे अखबारों में काम करने वाले पत्रकार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पूर्व लोकसभा प्रत्याशी इं डीपीएस रावत द्वारा मुख्यमंत्री तीरथ सिंह को भेजे ज्ञापन में कहा कि कोरोना में आज अपनी जान को जोखिम मे डालकर पत्रकार पल-पल की खबर व सरकार की हर योजनाओं, निर्णय प्रदेश की जनता को दे रहे है, पर सरकार इन पत्रकारों की कोई सुध नहीं ले रही है, उन्होंने कहा कि जब पत्रकार खबर ही नहीं लिखेंगे तो लोगों तक जानकारियां कैसे पहुचेगी, कैसे वह जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेंगे। इं डीपीएस रावत ने कहा कि कई छोटे पत्र पत्रिकाओं के पत्रकारों ने अपनी पूरी जिन्दगी सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में खपा दी हैं लेकिन सरकार ने कभी इन पत्रकारों की सुध तक नही ली। रावत ने कहा कि कोई अखबार बड़ा , छोटा नहीं होता , खबर छोटी बड़ी होती है। इ, रावत ने कहा कि कोरोना के इस संकट काल मे कई पत्रकारों की जान चली गई, लेकिन सरकार ने आज तक उनके परिवार की सुध तक नही ली, जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कोरोना काल मे जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही छोटे पत्र पत्रिकाओं व समाचार वेबपोर्टल को भी सरकारी विज्ञापन देने की मांग की है।