मुफ्त सुविधाएं प्रदेश के लिए घातक : आनन्द

जनमंच टुडे/रामनगर।

उत्तराखण्ड की राजनीति में दौड़ रहे मुफ्त बिजली के करंट को प्रदेशवासियों के लिए घातक बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता आनन्द सिंह नेगी ने प्रदेश में रोजगार क्षेत्र को बढ़ावा दिए जाने के लिए मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है। एक बयान में नेगी ने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का श्रंखलाबद्ध ढांचा खड़ा करके स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए देश-विदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में लागू सफल योजनाओं के मॉडल को राज्य की जरूरत के अनुसार लागू किया जा सकता है। आज भी पर्वतीय क्षेत्रों में तमाम विपरीत परिस्थियों के बाद भी जो भी आधी-अधूरी कृषि उपज पैदा होती है, उसको भी बाजार तक लाने व सुरक्षित रखने की कोई सुविधा नहीं है। जिससे अधिकांश फसल खराब हो जाती है। इन विकट स्थितियों को देखते हुए राज्य के युवाओं का कृषि क्षेत्र के प्रति कोई आकर्षण नहीं रहता। यह स्थिति उन्हें निश्चित पलायन की ओर धकेलती है। इसी पलायन के कारण आज राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के सुदूर गांव युवाविहीन हो चुके हैं। राज्य बनने की एक चौथाई शताब्दी की कगार पर पहुंचने के बाद भी हमारे नीति-नियंता राज्य के विकास के लिए कोई मॉडल खड़ा नही कर पाए। पहली निर्वाचित सरकार के कार्यकाल में भी मैदानी क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा दिया गया जो कि प्रदेश के सभी युवाओं को रोजगार देने में सक्षम नहीं हैं। अब राजनैतिक दलों ने भाजपा के ‘अच्छे दिन’ की तरह ‘मुफ्त बिजली’ के सब्जबाग दिखाने शुरू किए हैं, जिससे अंततः प्रदेश का ही अहित होगा। राज्य में पर्यटन व छोटी-छोटी विद्युत परियोजनाओं के क्षेत्र में अभी भी रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन कोई भी दल इस भगीरथी काम को करने का हौसला जुटाने के बजाए सस्ती और लोकलुभावन घोषणाएं कर महज़ सत्ता तक पहुंचने की कवायद में जुटे हैं। नेगी ने प्रदेश की जनता से आगामी विधानसभा चुनाव में वोट मांगने आने वाले राजनैतिक दलों से रोजगार के मुददे पर सवाल करने की अपील करते हुए कहा कि जनता को अपने आप को पंगु बनाये जाने की राजनैतिक दलों की साजिश का विरोध करते हुए अपने युवाओं के लिए सम्मानजनक आत्मनिर्भर रोजगार का ब्लू प्रिंट मांगना चाहिए। जो दल इस पर आनाकानी करे उसे प्रदेश की राजनीति से खारिज कर ऐसे लोगों को सत्ता सौंपे जो जनता को मुफ्तखोरी की आदत लगाने के बजाए सम्मानजनक रोजगार मुहैया कराए जाने में सक्षम हो।

  • रामनगर से वरिष्ठ पत्रकार सलीम मलिक।

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