हम राज्य की निर्यात नीति को प्रख्यापित करने जा रहे : धामी

जनमंच टुडे/ देहरादून।
देहरादून उत्तराखण्ड निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार के लिए, उद्योग विभाग उत्तराखण्ड सरकार एवं वाणिज्य विभाग भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में एक होटल में दो दिवसीय वाणिज्य उत्सव कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। कार्यक्रम केंद्र सरकार की देश की स्वाधीनता की 75 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव के रूप में एक पहल है। कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश के यशवस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना और विजन के रूप में ‘वाणिज्य उत्सव‘ सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जा रहा है, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के निर्यातकों की क्षमता के प्रदर्शन से भारत को वैश्विक स्तर पर एक उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के लिए निर्यात में 400 बिलियन अमरीकी डालर का एक आकांक्षात्मक, लेकिन व्यावहारिक साध्य लक्ष्य निर्धारित किया है जिसको प्राप्त करने में राज्य के सभी निर्यातकों का भी अहम योगदान होगा ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है इसके लिए राज्य सरकार आपके साथ है। राज्य में निर्यात क्षमता और राज्य से निर्यात योग्य उत्पादों एवं सेवाओं को बढ़ावा देने और प्रदर्शित करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार लगातार प्रयासरत है और बहुत जल्दी हम राज्य की निर्यात नीति को प्रख्यापित करने जा रहे हैं। राज्य में सड़क, रेल और हवाई संपर्क में सुधार के लिए सरकार भारत सरकार के सहयोग से राज्य सरकार लगातार काम कर रही है, ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेल परियोजना, ऑल वेदर चारधाम रोड़ परियोजना और भारतमाला सड़क परियोजना जैसी चल रही परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के दूरस्थ भागों से संपर्क बढ़ाना है। राज्यों से निर्यात बढ़ाने के लिए लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को भी बढ़ाया जा रहा है। हरिद्वार में लंबे समय से लंबित आई.सी.डी. के विकास की निगरानी नीति आयोग द्वारा की जा रही है। हमें उम्मीद है कि उनके हस्तक्षेप व सहयोग से प्रक्रिया में तेजी आएगी। उन्होनं यह भी जानकारी दी कि नीति आयोग द्वारा निर्यात तैयारी सूचकांक, 2020 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य को हिमालयी राज्यों की श्रेणी में ‘शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य‘ के रूप में मान्यता दी गई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योग मंत्री गणेश जोशी द्वारा की गई। मंत्री ने कहा कि वाणिज्य उत्सव का उद्देश्य वाणिज्यिक उत्पादन को बढ़ाकर निर्यात को बढ़ावा देना है। उत्तराखंड कुछ समय पूर्व तक मुख्य रूप से केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता था लेकिन आज यहां उपस्थित आप सभी उद्यमी एवं निर्यातकों के योगदान के साथ-साथ राज्य सरकार के प्रयासों ने हमें एक पसंदीदा ‘इनवेस्टमेंट डेस्टिनेशन‘ बना दिया है। हमारे पहले ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट ‘डेस्टिनेशन उत्तराखंड‘ को मिली प्रतिक्रिया उसी की अभिव्यक्ति है। इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में 600 से अधिक निवेशकों के साथ 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एम.ओ यू./आई.टी.आई. पर हस्ताक्षर किए गए। जिनमें से 26000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव अब तक धरातल पर आ गए हैं। हमने चिन्हित उत्पादों के केंद्रित प्रचार के लिए एक जिले के दो उत्पादों की पहचान की है और व्क्ज्च् योजना भी बहुत जल्द राज्य में शुरू की जाएगी।
इस अवसर पर उपस्थित सचिव उद्योग श्रीमती राधिका झा द्वारा विदेश व्यापार विभाग, भारत सरकार के प्रतिनिधियों से अपेक्षा की गयी कि राज्यों के निर्यात संभावनाओं की पहचान कर राज्यों को उसके अनुसार निर्यात के लिए चिन्हित किया जाय। राज्य में सेवा आधारित निर्यात जैसे पर्यटन, योगा, एडवेंचर टूरिज्म, हैल्थ एवं वैलनेस की प्रबल सम्भावनाये हैं जिसके लिए राज्य में सेवा निर्यात प्रोत्साहन काउंसिल के क्षेत्रीय कार्यालय का संचालन किया जाय।
कार्यक्रम के सह-आयोजक सेवा निर्यात संवर्धन परिषद के महानिदेशक अभय सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि वास्तव में राज्य में सेवा आधारित निर्यात की सम्भावनाओं को देखते हुए सहयोग एवं संवर्धन हेतु शीघ्र ही राज्य में सेवा निर्यात प्रोत्साहन काउंसिल का क्षेत्रीय कार्यालय का संचालन शुरू करने पर विचार किया जायेगा।
उप सचिव वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय श्री आनन्द भास्कर, भारत सरकार द्वारा राज्य के निर्यातकों से अनुरोध किया गया कि वे अपने फीडबैक एवं सुझाव वाणिज्य मंत्रालय को उपलब्ध कराने का कष्ट करें ताकि उसके आधार पर विभिन्न देशों से निर्यात की सम्भावनाओं एवं सरलताओं के लिए वार्ता की जा सके।
महानिदेशक एवं आयुक्त उद्योग ने उत्तराखण्ड में निर्यात एवं निर्यात की सम्भावनाओं पर प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि उत्तराखण्ड में 2017-18 में, रुपये 10,836.9 करोड़ रुपये का माल निर्यात किया, जबकि 2020-21 में निर्यात लगभग 15,914.94 करोड़ रुपये था। उत्तराखंड से निर्यात में योगदान देने वाले प्रमुख क्षेत्र फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल प्लास्टिक, कृषि एवं सहकृषि हैं। आगे यह भी कहा कि हमारा लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में 30,000 करोड़ रुपये मूल्य की वस्तुओं के निर्यात के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करना है। तकनीकी सत्र में वक्ताओं ने राज्य की निर्यात सम्भावनाओं, नये क्षेत्रों तथा चुनौतियों के सम्बन्ध में विस्तृत विचार विर्मश किया जिसमें सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष श्री विकास गर्ग ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य तथा निर्यात विषय पर विचार रखे। फिक्की चैप्टर की राज्य प्रभारी किरन भट्ट ने राज्य में साहसिक पर्यटन की अपार सम्भावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किये।