चौबट्टाखाल: दाव पर होगी प्रत्याशियों की ‘साख’

  • प्रीती नेगी/ जनमंच टुडे/ देहरादून।

इस इस बार भी चौबट्टाखाल विस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होगा। आप उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणी बनाने की कोशिश में है। अगर 2017 के मुकाबले 2022 में देखा जा, तो चौबट्टाखाल विधानसभा में कांग्रेस के लिए करो या मरो की जैसी स्थिति होगी वही भाजपा के सामने अपने दुर्ग को बचाने की चुनौती होगी। पलायन के चलते मतदाताओं की संख्या कम होने के बावजूद प्रदेश में इस सीट की गिनती हाॅट सीट में होती है। 2008 के परिसीमन में अस्तित्व में आये इस क्षेत्र की मुख्य मुददा पलायन, स्वास्थ्य,शिक्षा, बिजली, पानी, सड़क और रोजगार रही है। परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए इस सीट पर हर बार की तरह इस बार भी मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होने की उम्मीद है। तीरथ सिंह रावत की परंपरागत सीट होने के बावजूद भाजपा ने 2017 में तीरथ का टिकट काट कर कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में शामिल हुए सतपाल महाराज को यह सीट दे दी। महाराज भाजपा के उम्मीद पर खरे उतरे और मोदी लहर में उन्होंगने कांग्रेस के राजपाल बिष्ट को हराया सीट पर कब्जा बरकरार रखा। 2017 के चुनाव में महाराज समेत 16 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमाने मैदान में उतरे थे, लेकिन जनता ने महाराज को छोड़ सबको नकार दिया। महाराज को इस चुनाव में 20921 जबकि राजपाल बिष्ट को 13567 मतदाताओं ने मत दिया। तीसरे नम्बर पर कभी महाराज के करीबी रहे सुन्दर सिंह चैहान रहे। उन्हें 2545 मत मिले। जबकि टिकट न मिलने से नाराज भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे कविन्द्र इष्टवाल को 2339 मत मिले। राजनीतिक में जानकारी रखने वाले राजनीतिक विशलेषकों के अनुसार इस बार इस सीट पर मुकाबला रोचक होने के आसार है। राजनीतिक पंडितों के अनुसार इस बार डा़ हरक सिंह रावत के फिर कांग्रेस में आने से कांग्रेस प्रत्याशी को भी फायदा पहुंच सकता है, क्योंकि पूर्व में यह विस क्षेत्र पूर्व में डा़ रावत की कर्मस्थली रही है, लेकि उन्होंने भी जनता का मूड़ वक्त पर छोड़ दिया है।, वहीं 2022 की चुनाव की बात की जा, तो इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी बनने की हसरत लिये दावेदारी की है, लेकिन टिकट किसकों नसीब होगा अभी भविष्य की गर्त में हैं। भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं ने इस सीट पर दावेदारी की है। वर्ममान विधायक सतपाल महाराज, उत्राखंड रत्न डा- जयप्रकाश सेमवाल, और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महा मंत्री दीप्ती रावत। महाराज कुछ वर्ष पहले ही कांग्रेसछोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं, जबकि डा़ सेमवाल और रावत खांटी भाजपाई है। तीनों दावेदारों में एक समानता यह है तीनों का गृृहक्षेत्र इसी विधान सभा सीट के अंतर्गत है। दीप्ती रावत अपना पहला विस चुनाव भी यहां से लड़ चुकी है। वहीं कांग्रेस में दावेदारों की लम्बी कतार लगी हुई है। दोनो पार्टियां में अंदरूनी गुटबाजी न पनपे इसलिए प्रत्याशी चयन में कमेटी फूंक फूंक कर कदम रख रही है। इस बार कांग्रेस से राजपाल बिष्ट के साथ ही, पोखड़ा के पूर्व प्रमुख सुरेंद्र रावत,  विकास खंड एकेश्वर के पूर्व प्रमुख जसपाल रावत, कविंद्र इष्टवाल पौड़ी के पूर्व जिपं अध्यक्ष केसर सिंह, बीरोखाल के पूर्व प्रमुख राजीव कंडारी आदि ने दावेदारी जताई है। वहीं आम आदमी पार्टी ने चुनावी समर में उतरते हु, आप के पूर्व युवा विग के प्रदेश अध्यक्ष दिगमोहन नेगी पर भरोसा जताया है। वही रक्षामोर्चा ने पूर्व सैनिक केसर सिंह को मैदान में उतारा है। उतराखंड क्रांति दल ने वीरेंद्र सिंह रावत को चुनावी दंगल में उतार चुका है। इस बार आगामी चुनाव में भाजपा पर इसे बचाने और कांग्रेस पर इसे जीतने का बड़ा दबाव होगा। देखना होगा की 2022 में चौबट्टाखाल विस क्षेत्र से किस पार्टी को जनता का आशीर्वाद मिलेगा और विधानसभा सीट के परिणाम किस पार्टी के पक्ष में होंगे यह तो आने वाले 10 मार्च को ही पता चल पाएगा।

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