संस्कृति और परम्पराओं से जुड़ा पर्व है फूलदेई : धामी

जनमंच टुडे/देहरादून।
चैत्र मास की संक्रांति के साथ ही बच्चों का फूलदेई का त्योहार शुरू हो गया है। उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में यह त्योहार आठ दिनों तक चलता है। कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में बच्चों के साथ लोकपर्व फूलदेई मनाया। धामी ने प्रकृति का आभार प्रकट करने वाले फूलदेई पर्व की प्रदेशवादियों को शुभकामनाएं देने के साथ ही प्रदेश की सुख- समृद्धि की कामना की। फूलदेई लोकपर्व पर धामी ने ईश्वर से कामना की कि बसंत ऋतु का यह पर्व सबके जीवन में सुख समृद्धि एवं खुशहाली लाए। धामी ने इस अवसर पर आए बच्चों को उपहार भेंट किये। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि फूलदेई उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं परम्पराओं से जुड़ा प्रमुख पर्व है। उन्होंने कहा कि किसी राज्य की संस्कृति एवं परंपराओं की पहचान में लोक पर्वों की अहम भूमिका होती है। हमें अपने लोक पर्वों एवं लोक परम्पराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में लागातार प्रयास करने होंगे।
- शुभकामनाएं व्यक्त करने का एक अनोखा त्योहार है फूलदेई
उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में ये फूल डालने का क्रम माह की आठ गते तक मनाया जाता है। कुमाऊँ मण्डल के भी लगभग पूरे क्षेत्र में यह त्योहार न संक्रांति को ही मनाया जाता है। टिहरी जनपद के अधिकांश हिस्सों में फूल डालने का यह क्रम पूरे चैत्र माह चलता है। हिन्दू नव वर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है, लेकिन चैत्र मास प्रारंभ होने से बच्चे इसे नव संवत्सर के प्रारंभ होने के रूप में मनाते हैं। यह परम्परा बच्चों के द्वारा प्रत्येक घर को अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करने का एक अनोखा लेकिन विशुद्ध रूप से वैज्ञानिक और भारतीय तरीका है। हमारे वेद पुराणों में फूल देकर और फूल-पुष्प से पूजित कर सम्मानित करने का विधान है। इसी भावना के तहत बच्चे बसुधैव कुटुम्बकम की परम्परा का निर्वहन करते हुए प्रत्येक घर को प्रेम, स्नेह, खुशी और सुख-शान्ति के प्रतीक फूलों को घर की देहरी पर बिखेर कर यह कामना की जाती है।