काश्तकार सीख रहे जैविक खेती के गुर

लक्ष्मण सिंह नेगी।

जनमंच टुडे/ऊखीमठ।

सुविधा संस्था हल्द्वानी व उद्यान विभाग के सयुंक्त तत्वावधान में इन दिनों जनपद के तीनों विकास खण्डों के विभिन्न गांवों के लगभग 2250 काश्तकारों को तृतीय वर्ष के प्रथम चरण का प्रशिक्षण देकर जैविक खेती के उत्पादों के बारे में जानकारियां दी जा रही है जिसमें विभिन्न गांवों के काश्तकार बढ़ – चढ़कर भागीदारी कर रही है। तृतीय वर्ष के दूसरे व तीसरे चरण का प्रशिक्षण काश्तकारों को आगामी समय में निर्धारित तिथि पर दिया जायेगा। प्रशिक्षण में काश्तकारों को जैविक खेती के साथ तरल खाद उपयोग के साथ जैविक खेती से उत्पादित साग भाजी के बाजारीकरण की भी जानकारी दी जा रही है । काश्तकारों को प्रशिक्षण देने का मुख्य उद्देश्य काश्तकारों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करना है। ऊखीमठ विकासखण्ड के विभिन्न गांवों के काश्तकारों को प्रशिक्षण देते हुए मास्टर ट्रेनर नरेन्द्र नाथ ने बताया कि फसलों व साग – भाजी के उत्पादन में जैविक खाद का प्रयोग करने से फसलों के उत्पादन में वृद्धि होती है और फसलों से उत्पादित के अनाज के स्वाद में बदलाव आता है तथा जैविक खेती को कीटाणु कब नुकसान पहुंचाते हैं। मनोज कुमार ने बताया कि जैविक खेती से उत्पादित फसलों व साग – भाजी की बाजारों में खरीददारी में लोग अधिक रूचि रखते हैं। रोशन ने बताया कि यदि काश्तकार जैविक खेती उत्पादन में रूचि रखता है तो धीरे – धीरे आत्मनिर्भर बनाने सकता है तथा अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा मिल सकती है! सरिता देवी ने काश्तकारों को जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विक महामारी के बाद कुछ प्रवासी युवाओं द्वारा खेती अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का प्रयास किया तो गया मगर फसलों व साग – भाजी के उत्पादन में जैविक खाद का प्रयोग न होने के उन युवाओं को मेहनत के बजाय पारिश्रम कम मिल रहा है अगर वे युवा भविष्य में जैविक खेती अपनाते हैं तो उन्हें आत्मनिर्भर बनने का सुनहरा अवसर मिल सकता है। विजया देवी ने बताया कि जैविक खेती से उत्पादित फसलों व साग – भाजी के प्रयोग करने से मनुष्य स्वास्थ्य रहता है एवं अनेक बीमारियों से छुटकारा पाता है। कार्यक्रम समन्यवक दिनेश रतूड़ी ने बताया कि विकासखण्ड ऊखीमठ के करोखी, चुन्नी मंगोली, बडासू, श्री सहित 12 गाँव , विकासखण्ड जखोली के 13 गांवों तथा विकासखण्ड अगस्तयुनि के 14 गांवों के लगभग 2250 काश्तकारों को तृतीय वर्ष के प्रथम चरण का प्रशिक्षण दिया गया है। आने वाले समय में निर्धारित तिथि पर दो चरणों का प्रशिक्षण दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग व सुविधा संस्था की सामूहिक पहल पर विगत दो वर्षों में काश्तकारों में जैविक खेती के प्रति रूचि बढ़ी है तथा काश्तकारों की फसलों के उतपादन में वृद्धि हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *