इस स्थान पर गिरा था माता सती का हाथ

जनमंच टुडे/ देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में आस्था के प्रतीक मठ, मन्दिर सिद्धपीठ और शिवालय हैं। जिनके दर्शन के लिए लाखों भक्त यहां पहुँचते हैं। इन्ही में से एक है  टिहरी जनपद में स्थित सिद्धपीठ कुंजापुरी। यहाँ नवरात्रों में भक्तों का तांता लगा रहता है।  यह सिद्धपीठ कुंजापुरी नाम पर्वत शिखर पर  समुद्र तल से 1676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मंदिर पौराणिक एवं पवित्र सिद्ध पीठ के रूप में विख्यात है । पुराणों के अनुसार यह मंदिर जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया था। शिवालिक पहाड़ियों की चोटि पर स्थित इस मंदिर से हिमालय पर्वतमाला के स्वर्गारोहनी, गंगोत्री, बंदरपूँछ, चौखंबा और भागीरथी घाटी के ऋषिकेश, हरिद्वार और दूनघाटी के दृश्य दिखाई देते हैं । यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का मनोरम सुन्दर दृश्य दिखाई देता है, जिसे अपने कैमरों में कैद करने के लिए यहां श्रद्धालुओं पहुँचते है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति  ने अपने निवास स्थान कनखल हरिद्वार में एक भव्य यज्ञ का आयोजन कराया और इस भव्य यज्ञ में दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव को छोड़कर बाकि सभी देवी देवताओं को आमंत्रित किया।  अपने पिता द्वारा पति का यह अपमान देख माता सती  ने उसी यज्ञ में कूदकर अपने प्राणो की आहुति दे दी थी। भगवान शिव  सती के यज्ञ कुंड में कूदने की सूचना पर क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने अर्ध-देवता वीरभद्र और शिव गणों को कनखल में दक्ष से युद्ध करने के लिए भेज दिया। वीरभद्र ने भव्य यज्ञ को तहस- नहस कर कर दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। सभी सभी देवताओं के अनुरोध करने पर पर भगवान शिव ने राजा दक्ष को दोबारा जीवन दान दिया और उस पर बकरे का सिर लगा दिया। इसके बाद भगवान शिव सती के मृत शरीर उठाकर ब्रह्माण्ड के चक्कर लगाने लगे।  शिव के वियोग में पश्चात भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था। जिस कारन से सती के जले हुए शरीर के हिस्से पृत्वी के अलग-अलग स्थानों पर जा गिरे । कुंजापुरी पर्वत पर माता सती का हाथ (कुंजा) गिरा था। इसीलिए यह मंदिर कुंजापुरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस मन्दिर की सबसे बड़ी खाशियत है कि इस मंदिर में  ब्राह्मण के बजाए राजपूत जाती के  भंडारी जाति के लोग पूजा- पाठ करते हैं।  दूर, दूर से भक्त यहां पर आकर माँ कुंजापुरी देवी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है।

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