यहां आज भी जीवित है प्राचीन धार्मिक परम्पराएं

लक्ष्मण सिंह नेगी।

जनमंच टुडे। ऊखीमठ। मदमहेश्वर घाटी के ग्रामीणों की अराध्य देवी एवं रासी गाँव में विराजमान भगवती राकेश्वरी के मन्दिर में 22 वर्षों बाद कल से शुरू होने वाले दो दिवसीय भगवान श्रीकृष्ण के पौराणिक मांगलिक जागरों की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं। 22 वर्षों बाद पौराणिक मांगलिक जागरों के आयोजन को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह बना हुआ है साथ ही धियाणियों और प्रवासियों ने रासी गाँव का रूख कर लिया है।  ग्राम  प्रधान रासी, कुन्ती नेगी ने बताया कि शनिवार को शाम सात बजे से पौराणिक मांगलिक जागरों का  शुभारंभ होगा और रातभर  गायन होगा।

राकेश्वरी मन्दिर समिति के अध्यक्ष जगत सिंह पंवार ने बताया कि पौराणिक मांगलिक जागरों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण, भगवती राकेश्वरी सहित 33 कोटि देवी – देवताओं की महिमा का गुणगान कर विश्व समृद्धि व क्षेत्र के खुशहाली की कामना की जायेगी। तमेर कार्तिक सिंह खोयाल ने बताया कि रविवार को देव डोलियों का भव्य नृत्य और विशाल भण्डारे के साथ पौराणिक मांगलिक जागरों का समापन होगा। लेखाकार दलीप सिंह रावत ने बताया कि पौराणिक मांगलिक जागरों के आयोजन को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह बना हुआ है। दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम को भव्य रूप देने की सामूहिक पहल की जा रही है। मन्दिर समिति उपाध्यक्ष मदन भटट् ने बताया कि पौराणिक मांगलिक जागरों की परम्परा युगों से चली आ रही है। धार्मिक परम्पराओं को जीवित रखने में रासी गाँव के ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।  बद्री केदार मन्दिर समिति पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत, शिक्षाविद भगवती प्रसाद भटट् ने बताया कि पौराणिक मांगलिक जागरों के आयोजन के लिए राकेश्वरी मन्दिर को भव्य रुप से सजाया गया है और दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है। पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख जीवन्ती देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बलवीर भटट् प्रधान उनियाणा महावीर पंवार, वन पंचायत सरपंच कुंवर सिंह रावत, जीतपाल सिंह पंवार, शिक्षाविद रवि भटट्,महिपाल सिंह नेगी, हरेन्द्र खोयाल ने दो दिवसीय पौराणिक मांगलिक जागरों के सफल आयोजन में आम जनमानस से सहभागिता का आह्ववान किया है।

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