न छत न शिक्षक, कैसे बनेगा सुनहरा भविष्य

उत्तरकाशी। राज्य में भले ही शिक्षा के स्तर को सुधारने के दावे किए जा रहे हो, लेकिन राज्य में सरकारी स्कूलों की हालत राज्य बनने के 20 वर्षों बाद भी सुधार नही हो पाया है, जिसके चलते अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराने से कतरा रहे हैं। कई जगह स्कूलों में भवन तक नही है, जिस कारण नौनिहाल खुले आसमा के नीचे पढ़कर अपना सुनहरा भविष्य बुनने को मजबूर हैं। जनपद उत्तरकाशी के राजकीय इंटर कॉलेज साल्ड में विगत 10 वर्षों से भवन निर्माण नहीं हो पाया जिस कारण छात्र खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। भवन की कमी के चलते हल्की सी मौसम की बेरुखी भी बच्चों की पढ़ाई में खलल डाल देती है। कई आए सबने समय, समय पर स्कूल बनाने का वादा किया, लेकिन 10 वर्षों बाद भी उनका वादा, वादा ही बनकर रह गया। 40,50 साल पहले बना स्कूल भवन जर्जर हो चुका है, और कभी भी हादसा हो सकता है। रखरखाव के अभाव मद स्कूल भवन में जगह, जगह झाड़ियां उग चुकी है और भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है। डर के मारे छात्र -छात्राएं खुले मैदान में पढ़ने को मजबूर हैं। छात्र-छात्राओं का कहना है कि बर्फबारी और बरसात के दौरान वह स्कूल आने से डर लगता है। विद्यालय भवन इतना जजर्र हो चुका है कि वह हादसे को न्यौता दे रहा है और कभी भी कोई घटना हो सकती है। राजकीय इंटर कॉलेज साल्ड जनपद मुख्यालय से महज 6 किमी की दूरी पर स्थित है। अभिभवाक संघ और विद्यालय प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि 13 वर्ष पूर्व स्कूल के नए भवन का निर्माण शुरू हुआ था। वह तीन वर्ष चलकर विगत 10 वर्षों से काम बंद पड़ा हुआ था। जहां एक तरह जीर्ण-शीर्ण पुराने भवनों के चलते बच्चे खुले मैदान में पढ़ने पर मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर नया निर्माणाधीन भवन पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी दयनीय है कि नए और पुराने भवनों के कमरों और छतों पर घास उग आई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नए स्कूल भवन निर्माण और जीर्ण-शीर्ण भवनों को ठीक करने के लिए शासन-प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया है। लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे हैं। उन्होंने कहा अगर अब शासन-प्रशासन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करता तो उन्हें मजबूरन उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।