मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके…

जनमंच  टुडे/ नई टिहरी।

जीवन में सफल होने के लिए हौसले का होना बेहद जरूरी होता है। जब मन में विश्वास और हौसला होता है तो इंसान जीवन के हर मुसीबत को पार कर जाता है। हौसला इंसान की शक्ति को बढ़ाता  है और मंजिल तक पहुँचने के लिए प्रेरित करता रहता है। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। यह पंक्तियां टिहरी की  मंजू भंडारी पर सटीक बैठती हैं। भंडारी ने अपने मजबूत इरादों से चुनौतियों को मात देकर एक अलग पहचान बनाई। पिता की मौत के बाद उन्होंने न केवल खुद को संभाला। बल्कि परिवार के भरण- पोषण करने के लिए टैक्सी ड्राइवर बन गई और कार का स्टेयरिंग थाम लिया और मेहनत के बलबूते भाई के लिए भी वाहन खरीद लिया। मंजू की मेहनत आज युवाओं  के लिए प्रेरणा दायिक बन गई है। टिहरी जिले के भिलंगना ब्लाक के जाख गांव की मंजू भंडारी (42) के पिता की मौत उस वक़्त हो गई जब वह 18 साल की थी। इसके बाद तीन बहन और एक भाई के साथ मां लक्ष्मी देवी की जिम्मेदारी भी मंजू के कंधों पर आ गई। मंजू ने हिम्मत नहीं हारी और पिता की दुकान संभालने के साथ खेती के कार्य में मां का हाथ बंटाया।  2014 में मंजू ने एक अल्टो वाहन खरीद लिया। कार चलाने के लिए कामर्शियल लाइसेंस भी बनवा लिया। इसके बाद मंजू ने टैक्सी चलानी सीखी। जाख से घनसाली के बीच 22 किमी के क्षेत्र में यात्रियों को ले जाने लगीं। बाद में घनसाली से नई टिहरी, देहरादून, ऋषिकेश व श्रीनगर तक के यात्रियों को उनके मंजिल तक पहुँचाने लगी। आमदनी बढ़ने लगी तो मंजू ने अपने छोटे भाई सोहन सिंह भंडारी के लिए एक पिकअप वाहन खरीद लिया।  मंजू बताती हैं कि छोटे भाई को रोजगार दिलाने के मकसद से  पहले खुद टैक्सी चलाई। फिर बुकिंग से अच्छी कमाई होने पर भाई के लिए भी वाहन खरीदा। बताया कि वह अपनी तीनों बहनों एवं भाई की शादी भी कर चुकी है। हालांकि, परिवार की खुशी के लिए मंजू ने शादी नहीं की।

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