Uncategorized चन्द्रकुट पर्वत October 9, 2021 janmanchadmin प्रीती नेगी। उत्तराखण्ड अनादिकाल से देवी, देवताओं की वासस्थली रही है, यहां के कण, कण में देवी, देवताओं का निवास है। यह भूमि देवी,देवताओं को सबसे प्रिय रही है, और देवी देवताओं की सर्वाधिक पसन्दीय भूमि के रूप में प्रसिद्ध है, इसलिए इसे देवभूमि कहा जाता है। आज हम आपको ले चलते हैं, मां सती की शक्तिपीठों में से एक चन्द्रबदनी मंदिर । यह शक्तिपीठ जनपद नई टिहरी के चन्द्रकुट पर्वत पर 8 हजार ऊंचाई पर विराजमान है। यह उत्तराखण्ड केे 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां आदि जगतगुरु शंकराचार्य ने शक्तिपीठ की स्थापना की । स्कंदपुराण, देवी भागवत व महाभारत जैसे धार्मिक ग्रन्थों में इस सिद्धपीठ का विस्तार से बखान किया गया है। प्राचीन काल में चन्द्रबदनी को भुवनेश्वरी सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता था। मंदिर में माँ चन्द्रबदनी की मूर्ति नहीं है बल्कि श्रीयंत्र है । कहा जाता है कि जब शिव माता सती का मृत शरीर कन्धे पर डाल कर वियोग में आसमां के रास्ते इधर भटक रहे थे तो भगवान विष्णु से भोलेनाथ की व्यथा देखी नहीं गई तब उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत शरीर को खंडित करने का निर्णय लिया। जब उन्होंने माता सती के मृत शरीर को खंडित किया तो कहा जाता है कि माता सती का शरीर 51 टुकड़ों में कटकर गिरा था। किवंदती है कि माता सती का बदन इसी चन्द्रकुट पर्वत श्रृंखला पर गिरा था। माता सती का बदन इस स्थान पर गिरने से देवी की मूर्ति के कोई दर्शन नहीं कर सकता है । पुजारी भी अपनी आँखों पर पट्टी बाँध कर माता चन्द्रबदनी को स्नान कराते हैं । कहा जाता है कि एक बार किसी पुजारी ने गलती से अकेले में मूर्ति देखने का प्रयास किया था। उसके बाद उस पुजारी के आँखों की रोशनी चली गई थी । मंदिर में पुजार गांव के ब्राहमण पूजा अर्चना करते हैं । माता के दर तक पहुँचने के लिए भक्तों को सैकड़ों सीढ़ियों की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। चन्द्रबदनी मंदिर से सुरकंडा , केदारनाथ , बद्रीनाथ आदि पर्वत श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं। यहां गर्मीमियों में भी ठंडी बयार चलती है। Continue Reading Previous टिहरी जनपद में प्राइमरी शिक्षकों के हुए प्रमोशनNext मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्री को दिया धन्यवाद Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ