यहां चट्टानों में अवतरित हुई थी मां दुर्गा

प्रीती नेगी।

देवभूमि उत्तराखंड अनादिकाल से देवी, देवताओं और ऋषि, मुनियों का सब्सर प्रिय स्थान रहा है, और देवभूमि के कण, कण में उनका वास हैं। कदम, कदम पर मठ, मंदिर विराजमान हैं। उन्हीं में से एक है, पौड़ी जनपद के पौड़ी, मेरठ राजमार्ग पर स्थित  श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र दुर्गा मन्दिर। यह मन्दिर सदियों सर लाखों श्रद्धालुओं का आस्था और विश्वास का केंद्र रहा है। इस सिद्धपीठ को प्राचीन सिद्धपीठों में से एक माना जाता है। यह सिद्ध पीठ कोटद्वार, पौड़ी मोटरमार्ग पर घने सदाबहार वनों के मध्य विशालकाय चट्टानों और  कल, कल बहती खोह नदी के किनारे एक लम्बी गुफा में  स्थित है। कहा जाता है कि इस स्थान पर माँ दुर्गा प्रकट हुई थी।

मंदिर में  माँ जगदम्बा की चट्टानों में उभरी एक मूर्ति है।  गुफा के अन्दर एक ज्योति है , जो सदैव प्रज्ज्वलित रहती है। कहा जाता है कि मां दुर्गा का वाहन बाघ मन्दिर में मातारानी के दर्शन करने आता है,और किसी को हानि पहुँचाए बिना घने जंगल मे अन्तर्धान हो जाता है।  मन्दिर का स्वरूप एक ठेकेदार ने राजमार्ग के दौरान दिया गया था। कहा जाता है कि एक ठेकेदार सड़क निर्माण कार्य करवा रहा था, जैसे ही सड़क का काम इस स्थान पर पहुँचा लेकिन  अथक प्रयासों के बाद भी निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया और  नुकसान के चलते वह निराश और परेशान हो गया। उसके बाद उसने माता इस स्थान पर मातारानी का मंदिर बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद ठेकेदार ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया और मन्दिर में माँ दुर्गा की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा की। इसके बाद ठेकेदार ने सड़क का निर्माण कार्य शुरू करवाया तो कार्य में कोई व्यवधान नहीं आया। दुर्गा माता को समर्पित इस मंन्दिर को प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक माना जाता है । हर दिन यहां श्रद्धालु देवी दुर्गा का आशीर्वाद लेने आते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा अपने दर पर आए हरभक्त की मनोकामना पूर्ण करती हैं।

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