राज्य स्थापना दिवस पर पुलिस कर्मियों को मिला सम्मान

जनमंच टुडे// देहरादून।

 राज्यपाल  अवकाश प्राप्त ले ज  गुरमीत सिंह ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर  पर पुलिस लाइन में रैतिक परेड का निरीक्षण कर सलामी ली।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ले ज श्री गुरमीत सिंह (से नि)  ने उपस्थित जनसमूह को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने राज्य आन्दोलनकारियों को भी नमन किया। राज्यपाल ने अनुशासित और भव्य पुलिस परेड के लिए पुलिस परिवार को बधाई दी। अपने संबोधन में राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि राष्ट्र की कानून-व्यवस्था की नींव पुलिस है। समय के साथ पुलिस के कार्य एवं उत्तरदायित्व व्यापक होते जा रहे हैं। आज पुलिस केवल कानून व्यवस्था स्थापित करने तथा अपराधों पर नियंत्रण तक सीमित नही है। पुलिस की भूमिका रचनात्मक भी हो गई है। आज हमारी पुलिस युवाओं को उचित मार्गदर्शन देने, नशा-मुक्ति अभियान चलाने, असहाय लोगों की मदद करने, मानवीय सेवा तथा मुसीबत में पड़े लोगों तक सहायता पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य कर रही है, यह सराहनीय है।  हमें अपनी संवेदनशीन पुलिस से ऐसी ही अपेक्षा है। राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि पुलिस और पब्लिक के बीच बेहतर समन्यव आवश्यक है। आज ईफेक्टिव पुलिसिंग की आवश्यकता बढ़ गई है। पुलिस को नई परिस्थितियों के अनुसार अपनी क्षमता और टैªनिंग में निरन्तर सुधार की जरूरत है। आज के डिजिटल युग में साइबर क्राइम एवं सोशल मीडिया क्राइम भी पुलिस के समक्ष बड़ी चुनौती है। इसके लिये पुलिस विभाग में उच्च स्तरीय साइबर सेल के गठन की आवश्यकता है। समाज में अपराधों के नियंत्रण में टेक्नॉलाजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंफोर्ममेशन एण्ड क्युनिकेशन टेक्नॉलॉजी पुलिस के लिये वरदान सिद्ध हो सकती है। राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि वास्तव में लॉकडाउन के समय सबसे महत्वपूर्ण पक्ष था पुलिस द्वारा किये गये सामाजिक सेवा कार्य। पुलिस को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन सुनिश्चित करवाने के साथ ही लोगों को आवश्यक सूचनाएं देने तथा अनिवार्य वस्तुओं की आपूर्ति का कार्य भी करना पड़ा। पुलिस के अधिकारी तथा जवान तत्काल मदद की गुहार लगाने वाले नागरिकों के सीधे सम्पर्क में आ गए। राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पुलिस की भूमिका जरूरतमंदों की सहायता एवं सेवा पर केन्द्रित रही, यह अत्यन्त सराहनीय है। जरूरतमंदों को राशन, दवाईयां, मास्क, सेनेटाइजर, ऑक्सीजन कॉन्सट्रेटर आदि वितरित करके पुलिस अनेक असहाय लोगों के लिए आशा की किरण बनी। हमारे निष्ठावान पुलिस के जवानों ने अपने कर्तव्यों के पालन के साथ मानवता का धर्म भी निभाया तथा निराश्रितों का सहारा बनी, इसके लिए उत्तराखण्ड पुलिस परिवार को विशेष बधाई। राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि  इस वर्ष उत्तराखण्ड राज्य ने अपनी स्थापना के 21 वर्ष पूरे कर लिये हैं। आज हम पूरी तरह से युवा हो चुके हैं। एक युवा राज्य से जन अपेक्षाएं भी अधिक होंगी। निश्चित ही हमारी कार्यशैली, विजन और मिशन में और अधिक गम्भीरता की आवश्यकता होगी। हमें राज्य के विकास का रोडमैप उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, सुन्दर परम्पराओं, प्रकृति प्रेम की मान्यताओं एवं स्थानीय लोगों की भावनाओं के आधार पर बनाना होगा।  
राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएँ ही आर्थिक व सामाजिक सरंचना की रीढ़ हैं। हाल ही मैंने राज्य के कुछ पर्वतीय जिलों का दौरा किया। सच में,  पहाड़ की महिलाएँ स्थानीय उत्पादों एवं हस्तशिल्पों के माध्यम से क्रान्ति कर रही हैं। महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उनकी आमदनी बढ़ रही हैं। यह किसी चमत्कार से कम नही है। मैं पहाड़ की परिश्रमी एवं स्वाभिमानी नारियों की प्रंशसा करता हूँ। राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि  राज्य के पर्वतीय जिलों में कुछ युवाओं ने रिवर्स माइग्रेशन की बड़ी अच्छी मिसाल पेश की है। बड़े महानगरों से लौटे प्रवासी युवाओं ने अपने गांव-घरों में मशरूम की खेती, मुर्गी पालन, फलों और सब्जियों के उत्पादन से स्वरोजगार के द्वार खोले हैं। कुछ युवा उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांण्ड के रूप में स्थापित करने के लिये प्रयासरत है। वे थिंक ग्लोबली एक्ट लोकली के वाक्य को समझ चुके हैं।   बहुत से उच्च शिक्षित युवा मल्टीनेशनल कम्पनियों की नौकरियां छोड़ कर अपने गांवों को पुनः आबाद करने के मिशन में लगे है। आपकी हिम्मत और जुनून प्रंशसनीय है। उत्तराखण्ड के युवाओं का अपने गांव और मिट्टी से जुड़ने का यह जज्बा राज्य के विकास की नई इबारत लिखेगा।  
राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि  देश और दुनियाभर में रहने वाले उत्तराखण्ड के प्रवासी युवाओं से अनुरोध है कि आपके गांव, घर और पहाड़ आपकी राह देख रहे हैं। आप अपनी योग्यता, प्रतिभा और क्षमता का लाभ अपने राज्य को देने का यथासंभव प्रयास करें। राज्यपाल ने कहा कि युवा साथियों से यह भी आग्रह है कि वे ट्रांसफोर्मेशन, मॉर्डननाइजेशन, डिजिटलाइजेशन, इनोवेशन  की इस यात्रा से जुड़कर देश के विकास में योगदान दंे।  राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि वीरों की भूमि उत्तराखण्ड सैनिक राज्य है। लेकिन अब हमें अपने बेटों के साथ ही अधिक से अधिक बेटियों को भी सैन्य सेवाओं हेतु प्रोत्साहित करना होगा। यह प्रसन्नता का विषय है कि अब एनडीए के प्रवेश द्वार भी बालिकाओं के लिये खुल गये हैं। भविष्य में हमारी बेटियां भी सेना के बड़े एवं निर्णायक पदों  पर पहुंचेगी। वे राष्ट्र की एकता और अखण्डता की वीर प्रहरी होंगी। मुझे आशा है कि अधिक से अधिक पहाड़ की बेटियां भी सैन्य सेवाओं में आएंगी तथा देश तथा प्रदेश को गौरवान्वित करेंगी। मेरा राज्य में रह रहे भूतपूर्व सैनिकों से आग्रह है कि राज्य की प्रगति विशेषकर रिवर्स माइग्रेशन के लिये कार्य करें। अपनी सेना की टैªनिंग व अनुभवों का लाभ राज्य को दे। आपके समाज और राज्य को आपसे बहुत सी अपेक्षाएं हैं। राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करने का सपना है। भविष्य में पूरी दुनिया से लोग यहाँ आत्मिक शांति के लिए आएंगे। आधुनिक इतिहास में पहली बार इतने बडे़ स्तर पर केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि इक्कीसवी सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का होगा। यह हर उत्तराखण्डवासी के लिए हर्ष और गर्व का विषय है। राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने कहा कि हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिये रोपवे का निर्माण किया जा रहा है। अब दुनियाभर के सिक्ख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब जी के दर्शन और अधिक सुविधापूर्वक कर पाएंगे। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में  घोषणा की कि  उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों, जिनको रू. 3100 पेंशन प्राप्त हो रही है, को बढ़ाकर रू. 4500 तथा जिनको रू. 5000 पेंशन प्राप्त हो रही है, को बढ़ाकर रू. 6000 किया जायेगा। राज्य के प्रत्येक जनपद मुख्यालय पर अध्ययनरत छात्राओं के शिक्षा को सुगम एवं सुविधायुक्त बनाने हेतु एक-एक महिला छात्रावास का निर्माण किया जायेगा। राज्य में आवश्यकतानुसार जनपद मुख्यालयों पर कामकाजी महिला छात्रावास का निर्माण किया जायेगा। ईजा-बोई शगुन योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जच्चा-बच्चा के सुरक्षित स्वास्थ्य हेतु अस्पतालों में 48 घण्टे रुकने वाली प्रसूता महिला को रू. 2000 उपहार धनराशि भेंट की जायेगी। जी रैया चेली-जागी रैया नौनी  योजना के तहत 11 से 18 आयु वर्ग की किशोरियों को टी.एच.आर. सुविधा प्रदान की जायेगी। 11 से 18 आयु वर्ग की किशोरियों को सेनेटरी नैपकीन उपलब्ध कराने हेतु प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्रों में सेनेटरी नैपकीन वेण्डिंग मशीन की स्थापना की जायेगी। 11 से 18 आयु वर्ग की किशोरियों के बेहतर स्वास्थ्य परीक्षण यथाः हीमोग्लोबीन इत्यादि की जाँच निःशुल्क की जायेगी तथा हेल्प लाईन नं० 104 के माध्यम से निःशुल्क चिकित्सीय परामर्श भी उपलब्ध कराया जायेगा। आरोग्य उत्तराखण्ड क्रोनिक डीजीज  (दीर्घकालिक एवं पुरानी बिमारियां) के उपचार में ली जाने वाली दवाइयों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जायेगा। देहरादून एवं हल्द्वानी में नशामुक्ति केंद्र की स्थापना की जायेगी। राज्य में स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन डेवलपमेंट की स्थापना की जायेगी। कोविड-19 में सराहनीय कार्य के दृष्टिगत एनएचएम के कर्मियों को रू. 10,000 एकमुश्त प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की जाएगी। राज्य के युवाओं को देश से बाहर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने हेतु राज्य में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा। ई-डिस्ट्रिक्ट के माध्यम से संचालित 32 सेवाओं को अद्यतन करते हुए कुल 75 सेवाओं को ’’अपणि सरकार पोर्टल’’ के माध्यम से आम जनमानस को लाभ पहुंचाया जाएगा। सेवा का अधिकार अधिनियिम में अधिसूचित अवशेष 190 सेवाओं को भी शीघ्र ही ’’अपणि सरकार पोर्टल’’ के माध्यम से संचालित कर आम जनमानस को लाभ पहुंचाया जाएगा। प्रदेश में खेल को प्रोत्साहित करने तथा युवाओं को खेल की विभिन्न विधाओं से जोड़ने के लिए ’’खेल नीति-2021’’ तुरन्त लागू की जाएगी। उत्तराखंड में स्वास्थ्य, पर्यटन से राज्य की आर्थिकी को बढ़ाने हेतु राज्य को आयुष वेलनैस का हब बनाया जाएगा। जिसके अन्तर्गंत गढ़वाल मंडल विकास निगम एवं कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक गृहों में आयुष वेलनैस सेन्टर खोले जाएंगे।

 

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