शीतकाल के लिए बन्द हुए तुंगनाथ के कपाट

लक्ष्मण सिंह नेगी।

जनमंच टुडे।ऊखीमठ । पंच केदार में तृतीय केदार के नाम से प्रसिद्ध भगवान तुंगनाथ के कपाट आज 11बजकर 30 मिनट पर  लगनानुसार विधि – विधान,  मांगल गीतों व स्थानीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के साथ शीतकाल के लिए बन्द कर दिये गये। सोमवार को ब्रह्म बेला पर विद्वान आचार्यों आचार्यों द्वारा भगवान तुंगनाथ का महाभिषेक कर आरती उतारी। मठापति राम प्रसाद की मौजूदगी में विद्वान आचार्यों द्वारा भगवान तुंगनाथ के स्वयं भू लिंग को ब्रह्म कमल, भस्म, चन्दन, पुष्प अक्षत्र सहित विभिन्न पूजा सामाग्रियो से समाधि दी गयी।  इसके साथ ही भगवान तुंगनाथ जगत कल्याण के लिए तपस्यारत हो गये ! भगवान तुंगनाथ के कपाट बन्द होने के  अवसर पर 3 सौ 7 तीर्थ यात्रियों ने दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। इस बार पूरे यात्रा काल में 28 हजार 198 तीर्थ यात्रियों ने तुंगनाथ धाम में पूजा – अर्चना कर विश्व समृद्धि की कामना की। कपाट बन्द होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने मुख्य मन्दिर सहित सहायक मन्दिरों की परिक्रमा की तथा कैलाश से शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ के लिए रवाना होकर सुरम्य मखमली बुग्यालों में नृत्य करते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंची।  भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के चोपता पहुंचने पर स्थानीय व्यापारियों , जीप टैक्सी यूनियन व घोड़े खच्चर संचालकों द्वारा भण्डारे का आयोजन किया गया।मंगलवार को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली विभिन्न यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए अन्तिम रात्रि प्रवास के लिए भनकुण्ड पहुंचेगी और  9 नवम्बर को भगवान तुंगनाथ की चल शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ में विराजमान होगी और  10 नवम्बर से भगवान तुंगनाथ की शीतकालीन पूजा विधिवत शुरू होगी। मन्दिर समिति सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, मुख्य कार्यधिकारी योगेन्द्र सिंह ने बताया कि इस बार तुंगनाथ धाम में 28 हजार तीर्थ यात्रियों के पहुंचने से नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है तथा मन्दिर समिति की आय में भी वृद्धि हुई है ।इस मौके पर कार्यधिकारी आर सी तिवारी, राजकुमार नौटियाल, केदारनाथ धाम के प्रधान पुजारी टी गंगाधर लिंग, व्यापार संघ अध्यक्ष चोपता भूपेन्द्र मैठाणी, प्रबन्धक कालीमठ प्रकाश पुरोहित, प्रबंधक तुंगनाथ धाम बलवीर सिंह नेगी, कैलाश बगवाडी, कुशहाल सिंह नेगी, गिरीश देवली, चन्द्र मोहन बजवाल, धीर सिंह नेगी, अनिल जिरवाण, विनोद बिष्ट, रवीन्द्र मैठाणी, अतुल मैठाणी, विनोद मैठाणी, चन्द्र प्रकाश मैठाणी, गीता राम मैठाणी, मनोज मैठाणी, मुकेश मैठाणी, जय कृष्ण मैठाणी, सुनीता सेमवाल, एस पी सेमवाल,गायत्री देवी, कर्ण सिंह रौथाण मुकुल मैठाणी रवीन्द्र भटट् प्रेम सिंह राणा सहित मन्दिर समिति के अधिकारी, कर्मचारी, हक – हकूकधारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।

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