किसानों को सशक्त बनाया जाए : कोश्यारी

जनमंच टुडे। देहरादून। कृषि विभाग द्वारा आयोजित उत्तराखण्ड श्री अन्न महोत्सव  के तीसरे दिन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने अपने गांव की याद ताजा करते हुए कहा कि बचपन में मुझे गेहूं की रोटी मिलती थी और मेरी बहनों को मड़ूवे की रोटी, जिस कारण मेरा पेट हमेशा खराब रहता था और आज भी है। उन्होंने कहा कि मोटा अनाज मातृशक्ति के लिए बहुत अच्छा अनाज है और इसके लिए हमारा पहाड़ी क्षेत्र बहुत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि माणा और गूंजी में सिर्फ मोटा अनाज की पैदा होता है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट राजभवन में मैंने सिर्फ मड़वे के बिस्कुट अनिवार्य कर दिये थे, ताकि सभी को उत्तम स्वास्थ्य मिले। उन्होंने कृषि मंत्री ने अपेक्षा की कि उत्तराखण्ड में भी मड़वे के बिस्कुटों को अनिवार्य किया जाए, ताकि इसका प्रचार-प्रसार सहित उत्तम स्वास्थ्य मिल सके। उन्होंने कहा कि आंकड़ों पर बात न करते हुए मैं यह अनुरोध करुंगा कि कृषि और बागवानी की ओर  सभी को अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों को सशक्त करना  प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने  कहा कि कोदा झंगोरा खाएंगे आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड बनाएंगे। पद्मश्री एवं पद्मभूषण डा अनिल जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रदेश की तरक्की के लिए सिर्फ खेती-बाड़ी ही एक अच्छा साधन है और इसके लिए एक नये सिरे से सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने कोदा झंगोरा खाएंगे , पहाड़ी राज्य बनाएंगे के नारे को दोहराया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने इसे श्रीअन्न का नाम दिया। उन्होंने कहा कि मिलेट और माइनर फसलों के लिए उत्तराखण्ड विश्व स्तर पर प्रख्यात है। उन्होंने कहा कि जापान वाले भी मानते हैं कि उत्तराखण्ड का मोटा अनाज बेबी फुड के लिए अत्यधिक फायदेमंद है क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में केल्शियम है। उन्होंने कृषि मंत्री को कार्यक्रम के लिए बधाई दी। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा श्री अन्न उत्तराखंड की परंपरागत खेती में है। श्री अन्न स्वास्थ्य की दृष्टि से इतना लाभदायक है कि जो कभी गरीबों का खाद्यान्न हुआ करता था, आज अमीरों की थाली में शामिल हो गया है। जोशी ने कहा श्री अन्न के प्रोत्साहन और उसके प्रचार-प्रसार के लिए  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लगातार  प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में स्टेट मिलेट मिशन के अंतर्गत 73 करोड़ रूपए की बजट में प्रावधान किया गया है। कृषि मंत्री ने मडुंवा, झंगोरा जैसी फसलों को पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ावा देकर कृषकों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए भी विभाग के संकल्प को दोहराया। इससे पूर्व कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सभी अतिथियों का पहाड़ी टोपी, शाल और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इस अवसर पर महोत्सव में उपस्थित सभी अतिथियों ने मिलेट्स पर आधारित विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *