मौसम की बेरुखी ने बढ़ाई काश्तकारों की ‘चिंता’
- लक्ष्मण सिंह नेगी।
जनमंच टुडे। ऊखीमठ। बीते जनवरी व फरवरी माह में सीमान्त क्षेत्रों में मौसम के बर्फबारी न होने से काश्तकारों की सेब, आडूं, नाशपाती व खुमानी की फसलें खासी प्रभावित हुई है। विगत वर्षों की तुलना इस बार बर्फबारी के अभाव में काश्तकारों की फलों की फसलों का उत्पादन 70 प्रतिशत तो हुआ था, मगर विगत 27 मई को अधिकांश क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि होने से काश्तकारों की सेब, आडूं, खुमानी व नाशपाती सहित साग भाजी की फसलों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचने से काश्तकारों के सन्मुख आजीविका का संकट बना हुआ है तथा काश्तकारों को भविष्य की चिन्ता सताने लगी है! बता दे कि सेब, आडू, खुमानी और नाशपाती का उत्पादन सीमान्त क्षेत्रों में होता है व सभी फलों के उत्पादन के लिए मौसम के अनुकूल प्राप्त मात्रा में बर्फबारी होना शुभ माना जाता है। जनवरी व फरवरी माह में मानकों के तहत बर्फबारी होने से फलों का उत्पादन भरपूर मात्रा में होता है, मगर इस बार जनवरी व फरवरी माह में मौसम के अनुकूल बर्फबारी न होने से काश्तकारों की फलों की फसलों का उत्पादन क्षमता से कम हुआ है, साथ ही विगत 27 मई को भारी ओलावृष्टि होने से काश्तकारों की फलों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचने से काश्तकारों के अरमानों पर पानी फेर गया है जिससे काश्तकारों के सन्मुख आजीविका का संकट बना हुआ है तथा काश्तकारों को भविष्य की चिन्ता सताने लगी है।

गैड़ गाँव के काश्तकार गिरवीर सिंह राणा ने बताया कि विगत वर्ष की तुलना इस बार सेब, आडूं, खुमानी व नाशपाती का उत्पादन 70 प्रतिशत तो हुआ था मगर बीते 27 मई को मदमहेश्वर घाटी में भारी ओलावृष्टि होने से फलों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है तथा खेतों में मात्र 12 प्रतिशत ही फलों की फसल बची है। उनके अनुसार ओलावृष्टि से काश्तकारों की साग – भाजी की फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है! काश्तकार बलवीर राणा ने बताया कि सेबो के बेहतरीन उत्पादन के लिए जनवरी व फरवरी माह में भारी बर्फबारी होना आवश्यक होता है मगर इस बार जनवरी व फरवरी माह में मौसम के अनुकूल बर्फबारी न होने से फलों के उत्पादन पर खासा असर देखने को मिला है! काश्तकार शंकर पंवार ने बताया कि इस बार 27 मई को मदमहेश्वर घाटी के विभिन्न इलाकों में भारी ओलावृष्टि होने से काश्तकारों की साग – भाजी की फसलों को भारी नुकसान हुआ है जिससे काश्तकारों के सन्मुख आजीविका का संकट बना हुआ है। काश्तकार राकेश पंवार ने बताया कि प्रकृति के साथ समय – समय पर मानवीय हस्तक्षेप होने के कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती जा रही है जिसका सीधा असर मौसम परिवर्तन पर पड़ रहा है। मदमहेश्वर घाटी विकास मंच पूर्व अध्यक्ष मदन भटट्, व्यापार संघ मनसूना अध्यक्ष अवतार राणा ने बताया कि अप्रैल माह के अन्तिम सप्ताह में बेमौसमी बारिश होने से भी काश्तकारों की फलों व साग भाजी की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
