डीएम ने किया पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का दुख साझा
अल्मोड़ा। सल्ट विकासखंड के दूरस्थ ग्राम बोरडा तोक स्थित ग्राम तड़म में बीते दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष में ग्रामीण महिपाल सिंह की दुखद मृत्यु के बाद जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने आज स्वयं गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का दुख साझा किया। दुर्गम पैदल मार्ग से होकर गांव पहुंचे जिलाधिकारी ने यह संदेश दिया कि शासन-प्रशासन केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में जनता के साथ खड़ा है और उनकी पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ समझता है। जिलाधिकारी ने दिवंगत महिपाल सिंह के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने परिवार की महिलाओं और बच्चों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा भरोसा दिलाया कि परिवार को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है तथा हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पीड़ित परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए परिवार की एक बेटी को अस्थाई रूप से तहसील कार्यालय सल्ट में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में तैनात करने के निर्देश उपजिलाधिकारी को दिए। वहीं दूसरी बेटी को शिक्षक स्वयं सेवक के रूप में अस्थाई नियोजन दिए जाने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि इस दुखद घटना के बाद परिवार को संबल मिल सके तथा बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो। ग्राम तड़म पहुंचकर जिलाधिकारी ने ग्रामीणों के साथ विस्तृत संवाद किया और क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों ने वन्यजीवों के बढ़ते खतरे, आवागमन की कठिनाइयों, पेयजल संकट तथा मूलभूत सुविधाओं की कमी से उन्हें अवगत कराया। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग रानीखेत के अधिशाषी अभियंता के निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित रहने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। साथ ही अधिशाषी अभियंता को स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूरे ग्राम क्षेत्र में चेन लिंक फेंसिंग किए जाने के निर्देश दिए ताकि ग्रामीणों को जंगली जानवरों के खतरे से सुरक्षा मिल सके। साथ ही तड़म से भोनखाल तक मार्ग के सुधारीकरण एवं मार्ग पर सोलर लाइट लगाए जाने के निर्देश भी दिए, जिससे बच्चों और ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिल सके तथा रात्रि के समय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता है। जिलाधिकारी ने वन विभाग को क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों के लिए गधेरे से गांव तक पेयजल लाइन बिछाने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए, जिससे ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कुमेंरिया से बोरड तक सड़क निर्माण कार्य में भी शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के गांव पहुंचने, पैदल चलकर उनकी समस्याओं को समझने और संवेदनशीलता के साथ समाधान का भरोसा देने पर उनका आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि प्रशासन उनकी पीड़ा को वास्तव में समझ रहा है और उनके साथ खड़ा है। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी परिवार के लिए इस प्रकार की घटना अत्यंत दुखद होती है। प्रशासन का दायित्व केवल राहत प्रदान करना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को मानसिक और सामाजिक संबल देना भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शासन-प्रशासन क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा, विकास और समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
