रहस्य: हजारों गागर भरने के बावजूद कम नहीं होता ‘ कुई कुंड’ का जल
जनमंच टुडे/ ऊखीमठ।
देवभूमि उत्तराखंड के कण, कण में देवी, देवताओं का वास हैं। देव भूमि सदियों से ऋषि मुनियों की तप स्थली रही है। यह भूमि रहस्य और रोमांच से भरी हुई है। रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित देव सेनापति भगवान कार्तिक स्वामी की तपस्थली क्रौंच पर्वत अनेक रहस्यों से भरा हुआ है। भगवान कार्तिक स्वामी के देव सेनापति होने के कारण तैतीस कोटि देवी – देवताओं इस तीर्थ में आकर भगवान कार्तिक स्वामी की पूजा – अर्चना करते हैं। कार्तिक स्वामी तीर्थ में ऐडी़,आछरियां का वासस्थल माना जाता है, जिन्हें महिलायें अनेक प्रकार के श्रृंगार का सामान अर्पित करती है। क्रौंच पर्वत के चारों ओर 360 गुफाएं विद्यमान हैं। यहाँ साधक समय – समय पर जगत कल्याण के लिए साधना कर, सिद्धि मिलने पर विश्व भ्रमण पर निकले हैं। क्रौंच पर्वत पर 360 जल कुण्ड भी विद्यमान है जिनके दर्शन सौभाग्यशाली या फिर भगवान कार्तिक स्वामी का परम उपासक ही कर पाते हैं।

कार्तिक स्वामी तीर्थ के उत्तर पूरब दिशा के मध्य में चट्टानों के मध्य एक जल कुण्ड है जिसे स्थानीय भाषा में कुई कहा जाता है। इस जल कुण्ड तक पहुंचने के लिए पैदल मार्ग बहुत विकट है। इसलिए इस जल कुण्ड तक पहुंचने के लिए अदम्य साहस व प्रभु कार्तिकेय की असीम कृपा होना अनिवार्य माना गया है। 1942 से चली परम्परा के अनुसार प्रति वर्ष जून माह में होने वाले महायज्ञ व पुराणवाचन में इस जल कुण्ड से भव्य जल कलश यात्रा निकाली जाती है। पूर्व में इस जल कुण्ड तक पहुंचने के लिए एक पेड़ की लता का सहारा लिया जाता था, मगर लगभग 15 वर्ष पूर्व पेड़ की लता के टूटने से अब रस्सी के सहारे जल कुण्ड तक पहुंचा जाता है या फिर भगवान कार्तिक स्वामी का परम भक्त व प्रकृति का रसिक चट्टान पकडकर जल कुण्ड तक पहुंचते हैं। जल कुण्ड के तीन तरफ फैले चट्टान की एक विशेषता है कि जहाँ पांव पड़ जाये वही पांव रूक जाता है।

भारी बारिश में भी चट्टान पर फिसलने नहीं होती है। इस जल कुण्ड के इर्द – गिर्द गन्दगी होने पर जल कुण्ड का पानी सूख जाता है। ब्राह्मण द्वारा हवन कर जल कुण्ड का शुद्धिकरण के बाद ही जल कुण्ड में पानी पुनः भर जाता है। इस जल कुण्ड की एक और विशेषता है कि एक जल कलश भरने पर भी जल कुण्ड का जल समान रहता है व एक सौ जल कलश भरने पर भी जल कुण्ड का जल समान रहता है। जून माह में होने वाले महायज्ञ के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु जल कुण्ड के दर्शन करने की इच्छा जाहिर तो करते हैं, मगर भगवान कार्तिक स्वामी का परम भक्त व परम पिता परमेश्वर का सच्चा साधक ही जल कुण्ड के दर्शन कर पाता है। इस जल कुण्ड का जल इतना पवित्र है कि लोग अपने घरों में इस जल कुण्ड का जल पूजा स्थान पर रखते है। कार्तिक स्वामी मन्दिर समिति अध्यक्ष शत्रुध्न नेगी बताते है कि बीहड़ चट्टानों को पार करने के बाद जल कुण्ड तक पहुँचा जा सकता है। प्रबन्धक पूर्ण सिंह नेगी बताते हैं कि वर्तमान समय में रस्सी के सहारे जल कुण्ड तक पहुंचा जा सकता है। उपाध्यक्ष बिक्रम नेगी बताते हैं कि जिस भक्त के मन में जल कुण्ड के दर्शन करने की मन में अगाध श्रद्धा हो उसे जल कुण्ड के दर्शन अवश्य होते हैं । सचिव बलराम नेगी बताते है कि जल कुण्ड का जल हमेशा समान रहता है । कोषाध्यक्ष चन्द्र सिंह नेगी बताते हैं कि यह जल कुण्ड भगवान कार्तिक स्वामी के मन्दिर से लगभग एक किमी दूर है। क्षेत्र पंचायत सदस्य घिमलोली अर्जुन सिंह नेगी बताते है कि इस जल कुण्ड के दर्शन आसानी से नहीं किये जाते हैं क्योंकि यहाँ पहुंचने के लिए पैदल मार्ग बहुत कठिन व विकट है।
- वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मण सिंह नेगी।
