समाप्ति के कगार पर हिमालय : प्रो. नेगी

जनमंच टुडे/ पैठाणी।

रविवार को नमामि गंगे व केंद्र सरकार के जल मंत्रालय के तत्वावधान में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर चमोली ने गंगा दशहरा  व विश्व जल संरक्षण विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्घाटन महाविद्यालय की संरक्षक प्राचार्य प्रोफेसर आरके गुप्ता ने किया।  मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर एमएस नेगी भूगोल विभाग अध्यक्ष हेमंती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कहा कि पृथ्वी पर जल का संरक्षण आज महत्वपूर्ण बिंदु है, अगर पृथ्वी पर जल नहीं रहेगा तो पृथ्वी नहीं बचेगी। उन्होंने कहा जल ही जीवन है और जल के संरक्षण के लिए हमें खाली स्थानों पर चालखाल, तालाबों गाड़ गधेरों का जल संरक्षित करना होगा। उन्होंने कहा आज विश्व में पानी का टैंक कहे जाने वाले हिमालय समाप्ति के कगार पर है और लगातार ग्लोबल वार्मिंग के कारण  हिमालय पिघल रहा है और पानी की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है जिससे समुद्रों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो रही है। इसके साथ जैव विविधता भी समाप्त होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि समय रहते, अगर पानी इस्तेमाल को नहीं समझ पाया तो  भविष्य में हमें इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। गढ़वाल विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफ़ेसर बीपी नैथानी   कहा कि गंगा बचाओ अभियान 1986 में राजीव गांधी द्वारा चलाया गया था, तत्कालीन सरकारी गंगा को बचाने के लिए नमामि गंगे जैसे कार्यक्रम चला रहा है जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि  भूजल  धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है । उन्होंने कहां की सरकारों को पानी को लेकर ठोस नीति नियोजन बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष भूजल समाप्त होता जा रहा है और इसके लिए छात्रों व विषय विशेषज्ञों को भूजल बचाने के लिए संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि आज कई लोग भूजल को बचाने के लिए प्रयासरत हैं । महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर आर के गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठी वह कार्यक्रमों से जनमानस में नई जागरूकता पैदा होती है।  उन्होंने कहा कि शोध विषयों में भी भूमिगत जल पर शोध कार्य की जानी चाहिए जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में पीने की जल की आपूर्ति आसानी से हो सके और साथ-साथ में यहां की गंगा जमुना और सहायक नदियां संरक्षित व सुरक्षित सतत रूप से प्रवाहित हो सके।  राठ महाविद्यालय  प्राचार्य डॉ जितेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि विश्व में बढ़ते जलवायु प्रदूषण के कारण लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ता जा रहा है । भूजल के साथ-साथ भूमिगत जल का शहरी क्षेत्रों में अधिक दोहन होने से भूमिगत जल समाप्त की कगार पर है । उन्होंने कहा कि अगर समय रहते दोनों प्रकार की जल का संरक्षण नहीं किया गया तो मनुष्य को पानी के लिए विश्वयुद्ध करना पड़ेगा नमामि गंगे की नोडल अधिकारी डॉक्टर भालचंद सिंह नेगी ने कहा कि आज मनुष्य पानी की खोज के लिए चंद्रमा पर पानी ढूंढता जा रहा है किंतु धरती पर बढ़ते जल संकट को इग्नोर कर रहा है हमें अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जागरूक होना होगा वरना ही समस्याएं विकराल रूप ले सकती हैं उन्होंने कहा जल संरक्षण को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ में 1992रियोडि जिनेरियो में आयोजित प्रर्यावरण विकास पर संयुक्त राष्ट्र संघ की एसम्बली में विश्व जल दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।  । आज धरती पर पीने लायक पानी मात्र 3%है आज गंगा नदी तक पूरी तरह से शहरो के शिविर कचड़े से गंदगी से अपने अस्तिव के लिए संघर्षरत हैं आज गंगा दशहरा पर्व मनाया जा रहा है गंगा रहेगी तो जीवन रहेगा, जीवन को बचाना है तो गंगा को बचाना होगा। इसके लिए जिम्मेदारी से अपने आसपास की नदियां नालों गाड़ गधैऱ तालाबों झीलों झरनों को साफ रखने के लिए समाज के हर वर्ग को संकल्प लेने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में डॉ एसपी उनियाल, डॉ  मनीष कुकरेती, डॉ  पीएल शाह, डॉ गिरजा प्रसाद रतूड़ी आदि ने  विचार व्यक्त किए ।संचालन डॉ बीसीएस नेगी ने किया।

डॉ, देवकृष्ण थपलियाल।

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