योग धर्म नहीं, विज्ञान है : स्वामी चिदानन्द सरस्वती
जनमंच टुडे/ ऋषिकेश।
योग दिवस पर परमार्थ निकेतन में योग पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसका शुभारम्भ स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती ने किया। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में ’विश्व शान्ति ध्यान योग’ ध्यान के विशेष सत्र का आयोजन वर्चुअली किया गया, जिसमें भारत सहित विश्व के अनेक देशों के योगियों और योग जिज्ञासुओं ने सहभाग किया।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि योग हमारे ऋषियों की सदियों की तपस्या का सुखद परिणाम है। योग हमारी विरासत है जो पूरे विश्व के लिये अमूल्य उपहार है। कोविड महामारी के दौर में स्वस्थ और तनाव से मुक्त होने के लिये योग अत्यंत कारगर सिद्ध हुआ है।

योग न केवल शारीरिक स्तर पर बल्कि मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी हमें मजबूत करता है, इसलिये योग करें और निरोग रहें। उन्होंने कहा कि योग जीवन को अनुशासित करने की विधा है। योग जीवन के विषाद को प्रसाद बनाने में मदद करता है। स्वामी ने कहा कि हम योगी बन सके या न बन सके परन्तु कोरोना महामारी के इस काल में सहयोगी बने, उपयोगी बने और उद्योगी बने यही कर्मयोग है। यह यात्रा योग से सहयोग की ओर ले जाए।

परमार्थ गंगा तट पर योगाभ्यास के पश्चात योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती , डॉ इंदु शर्मा, गंगा नंदिनी त्रिपाठी, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार और परिवार के सदस्यों ने ’’हमारा हर दिन और हर पल योगमय हो, मानवता की सेवा हेतु समर्पित हो’’ यह संकल्प लिया।
- ऋषिकेश से मुकेश कुमार जैन।
