एक ऐसा मन्दिर जहां होते हैं माता के तीनों रूपों के दर्शन
प्रीती नेगी।
देवभूमि उत्तराखण्ड में मां काली को समर्पित एक ऐसा ही मन्दिर है जहां माता जगदम्बा भक्तों को सुबह बाल अवस्था, दिन में यौवना और सांध्यकाल में वृद्धा रूप में दर्शन देती हैं। इन्हें उत्तराखंड की संरक्षक व पालक देवी के साथ ही श्रद्धालुओं की रक्षक देवी माना जाता है। लोक मान्यता है कि माता अपना रूप बदलती है। देवभूमि में देवी मां काली को समर्पित एक ऐसा ही मन्दिर है, जो धारीदेवी के नाम से प्रसिद्ध है। पौडी जनपद के बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर, रुद्रप्रयाग के मध्य कलियासौड़ में पतित पावन अलकनंदा के तट पर विराजमान है। मां धारी देवी को देवभूमि की पालक और संरक्षक माना जाता है। कहां जाता है कि माता रानी की मूर्ति का ऊपरी आधा हिस्सा सदियों पहले अलकनंदा में बहकर इस स्थान पर पहुंचा था। तब से माता की मूर्ति शांत मुद्रा में यही विराजमान है। मूर्ति का निचला हिस्सा रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ में विराजमान है, जहां माता की काली रूप में आराधना की जाती है। मंदिर में माँ काली की प्रतिमा द्वापर युग में स्थापित की गई थी। प्रचलित कथा व मान्यता के अनुसार सदियों पहले एक रात जब भारी बारिश हो रही थी और अलकनंदा उफान पर थी। इसी दौरान धारी गाँव के समीप ग्रामीणों को किसी महिला की चीखने, चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर गाँव वाले अलकनन्दा की ऒर दौड़ पड़े। ग्रामीण जब वह उस स्थान पर पहुँचे तो उन्हें अलकनन्दा में मूर्ति तैरती दिखाई दी और चीखने, चिल्लाने की आवाज उसी मूर्ति में से आ रही थी। इसके बाद गांववासियों ने अलकनन्दा से मूर्ति को निकाल लिया और ग्रामीणों को मूर्ति को उसी जगह स्थापित कर दिया। धारी गाँव के समीप मूर्ति स्थापित होने केे बाद इस स्थल को धारी देवी का नाम दिया गया। दूसरी प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीनकाल में किसी सौतेली मां ने अपनी बेटी की हत्या करवा दी थी, और उसके टुकड़े करवा कर अलकनंदा में बहा दिये। लड़की का सिर व उसका ऊपरी भाग अलकनंदा में बहता हुआ धारी गांव तक पहुंचा तो एक धुनार( नाविक) ने उसे निकाल लिया और अलकनंदा के तट पर स्थापित कर दिया। मान्यता के अनुसार माता धारी दिन में तीन बार रूप बदलती है। माता सुबह बालिका, दिन में स्त्री, और सायं को वृद्धा रूप में दर्शन देती है । मंदिर में माँ काली की प्रतिमा द्वापर युग से स्थापित है । जो शांत मुद्रा में है । दुर्गा पूजा व नवरात्रि में विशेष पूजा, अर्चना मंदिर में होती है।
