जहां आज भी जीवित है ‘युगों की परंपरा’
- लक्ष्मण सिंह नेगी।
जनमंच टुडे। ऊखीमठ। मदमहेश्वर घाटी के ग्रामीणों की अराध्य देवी व पर्यटक गांव रासी के मध्य में विराजमान भगवती राकेश्वरी के मन्दिर में पौराणिक जागरों के गायन से रासी गाँव सहित मदमहेश्वर घाटी का वातावरण भक्ति मय बना हुआ है। सावन मास की संक्रान्ति से भगवती राकेश्वरी के मन्दिर में प्रतिदिन सांय सात बजे से रात्रि नौ बजे तक पौराणिक जागरों का गायन होता है। पौराणिक जागरो के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड के प्रवेश द्वार हरिद्वार से चौखम्बा हिमालय तक पग – पग पर विराजमान सभी देवी – देवताओं की महिमा के साथ भगवान शिव व पार्वती, भगवान श्रीकृष्ण जन्म उत्पत्ति, कंस वध, महाभारत के सभी अध्यायों का वर्णन किया जा रहा है। पौराणिक जागरो का समापन आश्विन माह के दो गते को दुर्योधन वध, पाण्डवों का राज्यभिषेक व भगवती राकेश्वरी को ब्रह्म कमल अर्पित करने के साथ होगा। भगवती राकेश्वरी के मन्दिर में पौराणिक जागरों के गायन की परम्परा युगों पूर्व की है।

पौराणिक जागरों के गायन में रासी व उनियाणा के ग्रामीणों द्वारा सहभागिता की जाती है। राकेश्वरी मन्दिर समिति अध्यक्ष जगत सिंह पंवार ने बताया कि युगों से चली परम्परा के अनुसार इस वर्ष भी भगवती राकेश्वरी के मन्दिर में पौराणिक जागरों का गायन जारी है। पौराणिक जागरों के गायन से रासी गाँव सहित मदमहेश्वर घाटी का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। पूर्ण सिंह पंवार ने बताया कि पौराणिक जागरों का गायन प्रति दिन सायं सात बजे से शुरू होता है। पौराणिक जागरों के समापन पर आरती व भोग वितरण की परम्परा है। शिवराज सिंह पंवार ने बताया कि जब भगवती राकेश्वरी रासी गाँव में विराजमान हुई तो उस दौर में ग्रामीणों मीलों से भगवती राकेश्वरी की पूजा करने आते थे। ग्रामीणों ने भगवती राकेश्वरी से रासी गाँव में बसने की प्रार्थना की और रासी गाँव में निवास करते की अनुमति मांगी। तब भगवती राकेश्वरी ने ग्रामीणों को वचन दिया की मेरी तप स्थली गाँव में बसने पर सभी धार्मिक मर्यादों का पालन करना होगा और सावन व भाद्रपद में सभी देवी – देवताओं की महिमा का गुणगान किया जायेगा, तभी मैं प्रसन्न रहूंगी। भगवती राकेश्वरी को दिये गये वचन अनुसार आज भी पौराणिक जागरों के गायन की परम्परा जीवित है। बद्री केदार मन्दिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत ने बताया कि मुकन्दी सिंह पंवार, राम सिंह पंवार, विनोद सिंह पंवार, कार्तिक सिंह खोयाल, उदय सिंह रावत, जसपाल सिंह जिरवाण, अमर सिंह रावत, कुंवर सिंह जिरवाण, कुलदीप सिंह पंवार, जसपाल सिंह खोयाल, लाल सिंह रावत द्वारा पौराणिक जागरों के गायन में सहयोग किया जा रहा है।

पण्डित ईश्वरी प्रसाद भटट्, भगवती प्रसाद भटट् ने बताया कि इन दिनों पौराणिक जागरो के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण जन्म व कंस वध की महिमा का गुणगान किया जा रहा है। रविन्द्र भटट्, मानवेन्द्र भटट् ने बताया कि पौराणिक जागरों के गायन में महिलाओं व युवाओं के अलावा रासी व उनियाणा के ग्रामीणों द्वारा सहभागिता दी जा रही है ।
