स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी : डीपीएस रावत
प्रदेश के ग्रामीण अंचल की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल । कैसे
लड़ेंगे कोरोना से पहाड़ की जनता बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को तरसी
पहाड़ के अस्पतालों को दुरुस्त करे सरकार,
देहरादून। राज्य की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर उत्तराखंड ने रोष जताया है और सरकार से बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की मांग की है। पौड़ी लोस क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी इ. डीपीएस रावत ने कहा कि कोरोना संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है, और इसने पहाड़ की ओर भी कदम बढ़ा दिए है, जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कोरोना की गति लगातार ऐसे ही बढ़ती रही तो इस संक्रमण को पहाड़ पहुँचने में कोई समय नहीं लगेगा। रावत ने कहा कि पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाएं बहुत ही बदहाल है, ऐसे में पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करना बेहद जरुरी है, जिससे कि संक्रमण को रोका जा सके। डीपीएस रावत ने कहा कि आज पूरे उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवायें पूरी तरह सेे चरमरा गई है। बदहाल व्यवस्था की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। कोरोना के चलते हालत और खराब होते जा रहे हैं। रावत ने कहा कि प्रदेश में सबसे अधिक ग्रामीण अंचल की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। जिससे लोगों को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के चलते कई लोग अस्पताल पहुँचने से पहले इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि रिखणीखाल , बीरोंखाल में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बहुत ही दयनीय है, राज्य बनने के 20 साल बाद भी यहाँ के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। रावत ने कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल होने से ग्रामीणों को मीलों दूर वाहन से कोटद्वार ले जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह पहाड़ का दुर्भाग्य ही है कि जिस उद्देश्य को लेकर जनता ने अलग राज्य की लड़ाई लड़ी थी, राजनैतिक महत्वाकांक्षा के चलते उसे हाशिये पर डाल दिया गया। रावत ने कहा कि जनसंघर्ष के बाद राज्य तो बना लेकिन लोगों को वह सुविधाए नहीं मिल पाई जिसकी कल्पना उन्होंने की थी। आज भी जनता को न तो रोजगार मिला, न बेहतर शिक्षा मिली, न बेहतर स्वास्थ्य सुविधाए । रावत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपने गांव के आसपास ही स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खोले गए स्वास्थ्य केन्द्रों पर अधिकांश पर डॉक्टर की तैैनाती न होने से उनमें ताले लटके हुए हैं जिससे लोगों को मजबूरन इलाज के लिए मैदानी क्षेत्रों के अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। आजकल कोरोना का प्रकोप चल रहा है, उसके बावजूद सरकार इस ओर मुँह मोड़े हुए है। उन्होंने कहा कि कई जगह शासन ने लाखों रुपए खर्च करके अस्पताल के ढांचे खड़े कर तो दिए, लेकिन सुविधाएं नही दे सकी, उनमे न डॉक्टर है न दवा । ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिए सरकार कोई पहल नहीं कर रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार से पहाड़ में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने की माँग की है। वही उन्होंने कोरोना के मद्देनजर उन्होंंने लोगोंं से अपील करते हुए कहा की वह कोविड गाइड लाइनों का प्रयोग करे, बेवजह भीड़भाड़ वाली जगह पर कतई न जाए, मास्क जरूर पहने औऱ सनाजिक दूरी बना कर रखे।
