सुहाना सफर और ये मौसम हसी…
- जनमंच टुडे/ उखीमठ।
कोरोना संक्रमण के चलते निचले क्षेत्रों में मिनी लाकडाउन होने से प्रकृति प्रेमी सुरम्य मखमली बुग्यालों, तीर्थ स्थलों, प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर स्थलों की सैर कर वहाँ के प्राकृतिक सौन्दर्य से रुबरु हो रहे हैं। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण मिनी लाकडाउन होने से केदार घाटी का जनमानस त्रियुगीनारायण – पवालीकांठा, चौमासी – मनणामाई – केदारनाथ, रासी – मनणामाई, मदमहेश्वर – पाण्डवसेरा – नन्दीकुण्ड, बुरूवा – विसुणीताल का भ्रमण कर वहाँ के प्राकृतिक सौन्दर्य से रूबरू हो रहे हैं। इसी क्रम में मदमहेश्वर घाटी के उनियाणा व गैड़ गांवों का आठ सदस्यीय दल मनणामाई तीर्थ की यात्रा कर लौटा है। मनणामाई तीर्थ मदमहेश्वर घाटी के रासी गाँव से लगभग 32 किमी दूर सुरम्य मखमली बुग्यालों के मध्य विराजमान है। मनणामाई को भेड़ पालकों की अराध्य देवी माना जाता है। सावन मास में रासी गाँव से भगवती मनणामाई की डोली अपने धाम के लिए जाती है तथा पूजा – अर्चना के बाद डोली रासी गाँव को वापस लौटती है! मनणामाई तीर्थ की यात्रा कर लौटे गैड़ निवासी शंकर सिंह पंवार ने बताया कि मनणामाई तीर्थ की यात्रा बहुत कठिन है व मनणामाई तीर्थ में हर भक्त की हर मनोकामना पूर्ण होती है! उनियाणा निवासी मुकेश पंवार ने बताया कि थौली से लेकर मनणामाई तीर्थ तक सुरम्य मखमली बुग्यालों की भरमार है तथा इन दिनों सुरम्य मखमली बुग्याल अनेक प्रजाति के पुष्पों से सुसज्जित होने से वहाँ के प्राकृतिक सौन्दर्य पर चार चांद लगे हुए है। गैड़ निवासी श्रीमती विमला देवी ने बताया कि पटूडी से मनणामाई तीर्थ तक हर पड़ाव पर भेड़ पालक निवासरत है तथा छह माह बुग्यालों में प्रवास करने वाले भेड़ पालकों का जीवन बडा़ कष्टकारी होता है ।
दल में शामिल उनियाणा निवासी राजेन्द्र पंवार ने बताया कि कालीमठ घाटी के चौमासी गाँव से खाम होते हुए भी मनणामाई धाम पहुंचा जा सकता है! अजय पंवार ने बताया कि मनणामाई धाम पहुंचने के लिए मदानी नदी को पार करने में बहुत कठिनाई होती है क्योंकि मदानी नदी में पुल न होने के कारण एक दूसरे को सहारा देकर मदानी नदी को पार करना पड़ता है। दल में शामिल लक्ष्मण सिंह पंवार, कुवर सिंह पंवार ने बताया कि मनणामाई तीर्थ की यात्रा करने के लिए सभी संसाधन साथ ले जाने पड़ते हैं।

कई जगह गुफाओं पर रात्रि गुजारने पड़ती है। उन्होंने बताया कि मनणामाई तीर्थ यात्रा के सम्पन्न होने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका भेड़ पालकों की होती है क्योंकि भेड़ पालकों के पास पहुंचने पर हर तीर्थ यात्री या प्रकृति प्रेमी को भरपूर दुलार मिलता है।
- ऊखीमठ से वरिष्ठ पत्रकार, लक्ष्मण सिंह नेगी।
