मैंने ग्रीष्मकालीन राजधानी की नींव रखी : रावत
जनमंच टुडे/ गोपेश्वर।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चमोली भृमण के दौरान पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी को कोई अधूरा नहीं छोड़ सकता। पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि उन्होने गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी की नींव रखी थी और अब गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी को कोई भी अधूरा नहीं छोड़ सकता। उन्होंने कहा कि इसके लिए उनकी सरकार ने 10 साल के लिए 2500 करोड़ रुपये का रोडमैप तैयार किया था। इसमें 1-2 करोड़ रुपए अवमुक्त कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पेयजल लाइन बिछाने का काम शुरू हो गया है। रावत ने कहा कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बन कर रहेगी और अब कोई भी गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी को अधूरा नहीं छोड़ सकता। उत्तराखंड भू-कानून पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस पर गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है। पूर्व सीएम का कहना था कि एससी/एसटी भू कानून का अध्ययन किया है। उन्होंने झारखंड जैसे राज्य का भ्रमण कर वहां के भू कानून का अवलोकन किया है। उन्होंने कहा कि एक ओर हम ग्लोबलाइजेशन की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर किसी को प्रवेश नहीं देंगे। इस पर एक बड़ी परिचर्चा किए जाने और गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता है। देवस्थानम बोर्ड पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होने जनहित के मामलों को लेकर कभी विरोध की चिंता नहीं की। उन्होंने कहा कि देवस्थानम बोर्ड आने वाले समय में तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे चारधामों में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। इसका लाभ सभी को मिलेगा। कहा कि जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे अभी तक इसके फायदे नहीं समझ पाएं हैं। आने वाले 10 सालों के बाद उन्हें इसका पता चलेगा।
