इस बार दाती त्योहार के बाद होगी लोकजात यात्रा की वापसी

जनमंच टुडे/ ऊखीमठ।

मदमहेश्वर घाटी के ग्रामीणों व भेड़ पालकों की अराध्य देवी मनणामाई लोक जात में शामिल तीन सदस्यीय दल वापस रासी गाँव पहुंच गया है जबकि मनणामाई इस बार भेड़ पालकों के दाती त्यौहार के बाद लौटने की सम्भावना है तब तक भगवती मनणामाई की पूजा – अर्चना उनके तप स्थल रासी गाँव से लगभग 32 किमी दूर मदानी नदी के किनारे बसा मनणा धाम में होगी। बता दे कि इस बार भेड़ पालकों की अराध्य देवी मनणामाई की लोक जात यात्रा 19 जुलाई को मदमहेश्वर घाटी के रासी गाँव से शुरू हुई थी, वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण मनणामाई की लोक जात यात्रा सादगी से शुरू होने के कारण लोक जात यात्रा में मात्र छह ग्रामीण शामिल हुए थे तथा पैदल मार्ग पर दो ग्रामीणों की तवियत खराब होने के कारण उन्हें आंधे पैदल मार्ग से वापस रासी गाँव लौटना पड़ा था इसलिए लोक जात यात्रा में शामिल ग्रामीणों की संख्या चार रह गयी थी। मनणामाई की लोक जात यात्रा में शामिल चार सदस्यीय दल के मनणामाई धाम पहुंचने पर ग्रामीणों द्वारा विधि – विधान से मनणामाई की पूजा – अर्चना कर विश्व कल्याण की कामना की गयी। मनणामाई की लोक जात यात्रा में शामिल शिव सिंह रावत, अंकित राणा व बलवीर पंवार शनिवार को मनणामाई धाम से वापस रासी गाँव पहुंच चुके है जबकि मनणामाई की डोली व पुजारी ईश्वरी प्रसाद भटट् मनणामाई धाम में तपस्यारत है। जानकारी देते हुए मनणामाई की लोक जात यात्रा में शामिल शिव सिंह रावत ने बताया कि इस बार मनणामाई की लोक जात यात्रा की वापसी भेड़ पालकों के दाती त्यौहार के बाद होगी ! कैसे मनाया जाता दाती त्यौहार छ: माह सुरम्य मखमली बुग्यालों में प्रवास करने वाले भेड़ पालकों के लाई व दाती त्यौहार प्रमुख रूप में मनाये जाते है। लाई त्यौहार प्रतिवर्ष भाद्रपद की पांच गते को मनाया जाता है तथा लाई त्यौहार के दिन भेड़ों की ऊन कटाई की परम्परा है। दाती त्यौहार रक्षाबन्धन के निकट कुल पुरोहित द्वारा निर्धारित तिथि पर मनाया जाता है! भेड़ पालकों से मिली जानकारी के अनुसार दाती त्यौहार के दिन सर्व प्रथम भेड़ पालकों के अराध्य देव क्षेत्रपाल, ऐड़ी आछरी व सिद्ववा – विद्धा की पूजा – अर्चना की जाती है, उसके बाद भेडो़ के सेनापति का चयन करने के बाद सेनापति का राज्यभिषेक किया जाता है! दाती मेले के बाद भेड़ पालकों के ब्रह्मचर्य की अवधि समाप्त हो जाती है! दाती मेले से पूर्व बुग्यालों में रहने वाले भेड़ पालकों को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है! दाती त्यौहार को सुरम्य मखमली बुग्यालों में मनाया जाता है।

  • लक्ष्मण सिंह नेगी, वरिष्ठ पत्रकार ऊखीमठ।

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