आसान नहीं हथियार का लाइसेंस मिलना
जनमंच टुडे।
लाइसेंसी हथियार को प्राप्त करना इतना आसान नहीं जितना आप समझ रहे हैं। हथियार के लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए कई प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, उसके बाद ही आप लाइसेंसी हथियार खरीद सकते हैं। वैसे तो आजकल लाइसेंसी हथियार रखना एक स्टेट सिम्बल बन चुका है, लेकिन हथियार रखने के लिए आम नागरिक के पास कोई खास वजह होनी चाहिए। आइए आज हम आपको लाइसेंसी हथियार कैसे खरीदा जा सकता है और कौन इसको खरीद सकता हैं। इसके बारे में पूरे विस्तार से जानकारी देते हैं। केंद्र व राज्य सरकार ने लाइसेंस के लिए नियम बना रखे हैं। नियम अनुसार ही लाइसेंस जारी होते हैं। इसकी प्रक्रिया थोड़ी जटिल है, इसलिए लाइसेंस मिलने में महीने, साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। आम नागरिक के पास लाइसेंसी हथियार रखने के लिए कोई खास वजह होनी चाहिए। मतलब यह कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को यह सिद्ध करना होगा कि उसे और उसके परिवार को किसी से जान का खतरा है या उसका प्रोफेशन ऐसा है जहां उसे हथियार रखने की जरूरत है। यह बातें सही हो तो वह हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते है। आवेदक को सबसे पहले आवेदन करते वक्त एड्रेस प्रूफ, आयु प्रमाण पत्र, कैरेक्टर सर्टीफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, मेडिकल सर्टिफिकेट, संपत्ति की जानकारी, लोन या उधार ले रखा है तो उसके बारे में जानकारी, नौकरे करते हैं या बिजनेस मैन है, उसकी जानकारी देनी होगी। कौन सा हथियार रखना चाहते हैं, उसका विकल्प भी बताना होगा। आवेदक केवल रिवॉल्वर, पिस्टल, राइफल या बंदूक के लिए ही आवेदन कर सकता है। आवेदक मशीन गन के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। पूर कागजी कार्रवाई के बाद लाइसेंस के लिए जिलाधिकारी या कमिश्नर के ऑफिस में आवेदन करना होता है। वहां से आवेदन पत्र पुलिस निदेशक के पास भेजा जाता है। यहां से जांच के लिए आवेदन पत्र आवेदक के लोकल थाने में जाता है। इस मामले में लोकल थाना पुलिस की जांच सबसे महत्वपूर्ण होती है। लोकल पुलिस आपका पता, पृष्ठभूमि, कामकाज व आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं इसकी पूरी जानकारी खंगालती है। इसके बाद सब कुछ ठीक रहा तो आवेदन पत्र व दस्तावेज जिला क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पास भेज दिया जाता है। जिला क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में भी आवेदक के क्रिमिनल बैकग्रांउंड की पूरी जानकारी खंगाली जाती है। थाने से आई रिपोर्ट को दोबारा चेक किया जाता है। इसके बाद आवेदन रिपोर्ट के साथ फिर वापस एसपी ऑफिस भेज दिया जाता है। यहां कुछ कागजी औपचारिकताएं होती है, जिन्हें पूरा किया जाता है और एसपी ऑफिस से आवेदन को डीएम या पुलिस कमिश्नर के दफ्तर भेजा जाता है। आवेदक के बारे में एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) भी जांच करती है। अब एसपी और एलआईयू की रिपोर्ट डीएम को पास पहुंचती है, जहां से आखिरी मोहर लगती है। डीएम के विवेक पर निर्भर करता है कि शस्त्र लाइसेंस देना है या नहीं देना। लाइसेंस मिलने के बाद आवेदक सरकार द्वारा निर्धारित हथियार की दुकान पर जाकर विकल्प में चुने गए हथियार को खरीद सकते हैं। इसके बाद आवेदक को हथियार को प्रशासन व लोकल थाने में ले जाना होता है। प्रशासन स्तर पर लाइसेंस में हथियार का दर्ज विवरण और खरीदे गए हथियार की जानकारी का मिलान किया जाता है और उसका रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है, उसके बाद फिर संबंधित थाने मेें इसकी जानकारी दर्ज की जाती है। इसके बाद आवेदक हथियार को घर ले जा सकता है।
