महाराज और हरक सिंह में होगी ‘चुनावी जंग’?
जनमंच टुडे/ देहरादून।
इस बार प्रदेश विस चुनाव में चौबट्टाखाल सीट पर महासंग्राम होने की सम्भावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का अनुसार अगर कांग्रेस ने डॉक्टर हरक सिंह रावत को यहां से मैदान में उतारा तो सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। विस चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बावजूद कांग्रेस और भाजपा ने कई विस सीटों पर प्रत्याशियों को मैदान में नहीं उतारा है। चौबट्टाखाल विस क्षेत्र से भाजपा ने सतपाल महाराज को एक बार फिर से चुनावी मैदान में उतारा है, वही कांग्रेस ने अभी तक किसी भी प्रत्याशी के नाम को उजागर तक नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार इस बार कांग्रेस इस सीट को हर हाल में परचम लहराना चाहती है, इसलिए इस सीट पर परिवार से दो टिकट के फार्मूले पर पुनर्विचार भी कर सकती है और हरक सिंह रावत यहां से चुनावी मैदान में कूदेंगे। डॉ रावत के चुनावी मैदान में आते ही, भाजपा को अपना दुर्ग बचाने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

इस इस बार भी चौबट्टाखाल विस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होगा। अगर 2017 के मुकाबले 2022 में देखा जा, तो चौबट्टाखाल विधानसभा में कांग्रेस के लिए करो या मरो की जैसी स्थिति होगी वही भाजपा के सामने अपने दुर्ग को बचाने की चुनौती होगी, लेकिन हरक सिंह रावत मैदान में कूदते हैं तो, चुनावी समीकरण कुछ भी हो सकता है। 2008 के परिसीमन में अस्तित्व में आये इस क्षेत्र के मुख्य मुद्दे आने विस क्षेत्रों की तरह ही पलायन, स्वास्थ्य,शिक्षा, बिजली, पानी, सड़क और रोजगार है। इस बार भी मुख्य मुकाबला यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होगी। तीरथ सिंह रावत की परंपरागत सीट होने के बावजूद भाजपा ने 2017 में तीरथ का टिकट काट कर कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में शामिल हुए सतपाल महाराज को यह सीट दे दी। महाराज भाजपा के उम्मीद पर खरे उतरे और इस बार भी महाराज को इस सीट से चुनाव में उतारा है, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रत्याशी नही उतारा। सम्भावना जताई जा रही है कि कांग्रेस के हरक सिंह रावत इस सीट से मैदान में उतरेंगे। उनके प्रत्याशी घोषित होते ही अन्य दावेदारों के भी उनके समर्थन में आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक में जानकारी रखने वाले राजनीतिक विशलेषकों के अनुसार इस बार इस सीट पर मुकाबला रोचक होने के आसार है। राजनीतिक पंडितों के अनुसार इस बार डा हरक सिंह रावत के फिर से कांग्रेस में आने से कांग्रेस की पुरानी लाबी भी उनके साथ जुड़ सकती है। क्योंकि पूर्व में यह विस क्षेत्र पूर्व में डा रावत की कर्मस्थली रही है, लेकि उन्होंने भी जनता का मूड़ वक्त पर छोड़ दिया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने चुनावी समर में उतरते हुए आप के पूर्व युवा विग के प्रदेश अध्यक्ष दिगमोहन नेगी पर भरोसा जताया है। वही रक्षामोर्चा ने पूर्व सैनिक केसर सिंह को मैदान में उतारा है। उतराखंड क्रांति दल ने वीरेंद्र सिंह रावत को चुनावी दंगल में उतार चुका है। आगामी चुनाव में भाजपा पर सीट को बचाने और कांग्रेस पर भाजपा के दुर्ग को ढहाने की चुनौती होगी। 2022 में चौबट्टाखाल विस क्षेत्र से किस पार्टी को जनता का आशीर्वाद मिलेगा और विधानसभा सीट के परिणाम किस पार्टी के पक्ष में होंगे 10 मार्च को ही पता चल पाएगा। टिहरी और नरेन्द्र नगर सीट पर भी इस बार मुकाबला रोचक होने की संभावना है। टिहरी से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को टिकट मिलने की संभावना है। भाजपा ने भी इस सीट पर अपने पत्ते नहीं खोले है। वहीं नरेंद्र नगर में भाजपा से नाराज चल रहे पूर्व विधायक गोपाल रावत को कांग्रेस टिकट देती है, इस सीट पर भी महामुकाबला होगा। वहीं देहरादून के कैंट विस सीट पर टिकट न मिलने और दिवंगत विधायक की पत्नी को टिकट देने से कई भाजपा कार्यकर्ता नाराज हो गए हैं।
