जहाँ होती है भगवान शंकर के भुजाओं की पूजा

ऊखीमठ। पंच केदार में तृतीय केदार के नाम से विख्यात भगवान तुगनाथ के कपाट खुलने की प्रक्रिया 18 मई को शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कडेय तीर्थ मक्कूमठ में शुरू होगी। लाक डाउन के कारण भगवान तुगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली  के लिए जिला प्रशासन की क्या गाइडलाइन होगी यह  17 मई को स्पस्ट हो पायेगा। यदि लाक डाउन के नियमों में परिवर्तन नहीं किया गया तो भगवान तुगनाथ की डोली भी अन्य देव डोलियों की तर्ज़ पर मक्कूमठ से चोपता तक वाहन से जा सकती है जिसके लिए प्रशासन, तीर्थ पुरोहितों व हक- हकूधारियो के मध्य सामंजस्य होना अनिवार्य होगा। पूर्व में घोषित तिथि के अनुसार 18 मई को भगवान तुगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली परम्परा के अनुसार अपने शीतकालीन गद्दी स्थल के सभा मण्डप से बाहर निकलेगी व हिमालय के लिए रवाना होकर प्रथम रात्रि प्रवास के लिए गाँव के मध्य में विराजमान भूतनाथ मन्दिर पहुंचेगी। यहां पर परम्परा अनुसार ग्रामीणों द्वारा मुणखी मेले का आयोजन कर भगवान तुगनाथ को नये अनाज का भोग लगाया जायेगा । 19 मई को भगवान तुगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली भूतनाथ मन्दिर से रवाना होकर पावजगपुणा, चिलियाखोड, बनिया कुण्ड के सुन्दर मखमली बुग्यालों में नृत्य कर अन्तिम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंचेगी तथा 20 अप्रैल को भगवान तुगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली के धाम पहुंचने पर 11:30 बजे भगवान तुगनाथ के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिये जायेगें । चन्द्रशिला की तलहटी में बसे भगवान तुगनाथ के धाम में भगवान शंकर के भुजाओं की पूजा होती है । यह तीर्थ पंच केदार में सबसे अधिक ऊंचाई पर विराजमान है। तुगनाथ, क्यूजा व हापला घाटियों के ग्रामीणों द्वारा इस तीर्थ में अपने पित्रों की अस्थियाँ विसर्जित की जाती है। तुगनाथ धाम के शीर्ष पर चन्द्र शिला पहाड़ी में गंगा मैया का तीर्थ विराजमान है, इस तीर्थ को प्रकृति ने अपने अनूठे वैभव का भरपूर दुलार दिया है। यहाँ से हिमालय की चमचमाती सफेद चादर व प्रकृति के अदभुत नजारों को एक साथ दृष्टिगोचर किया जा सकता है। प्रकृति ने तुगनाथ घाटी के पग – पग को नव नवेली दुल्हन की तरह सजाया व संवारा है। इस घाटी में बसे छोटे- छोटे हिल स्टेशन, मखमली घास से सजे ढालदार बुग्याल, अपार वन सम्पदा व अनेक प्रजाति के जंगली जानवरों की निर्भीक उछल कूद को निहार कर मानव प्रकृति का हिस्सा बनकर यहाँ के शान्त व एकान्त वातावरण में रम जाता है! तुगनाथ घाटी की सुन्दरता को निहारने के लिए वर्ष भर सैलानियों का आवागमन जारी रहता है।

  • लक्ष्मण सिंह नेगी।
  • वरिष्ठ पत्रकार, ऊखीमठ।

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