बेडू से आएगी गांवों में खुशहाली
जनमंच टुडे।देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के मध्य हिमालयी क्षेत्र के 1,550 मीटर ऊपर स्थानों के कुछ हिस्सों के साथ ही पंजाब, कश्मीर, हिमाचल, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, सोमानिया, इथीयोपिया के साथ ही सुडान में पाया जाने वाले बेडू के छाल, जड़, पत्तियां, फल के साथ ही इससे निकलने वाला सफेद दूध जैसा चोप औषधियों गुणों से भरपूर होता है। सदियों से हाथ पावं में चोट लगने पर बेडू के चोप का प्रयोग किया जाता है। इसके फल में शर्करा और श्लेष्मा गुण पाए जाते हैं जो कि कब्ज रोगियों के लिए बेहतर माना जाता है। इसके साथ ही बेडू के फल में कार्बनिक पदार्थ के साथ-ही एंटीऑक्सीडेंट गुण पाये जाते हैं जो तंत्रिका तंत्र विकार के साथ ही दिल से सम्बंधित बीमारियों के लिए रामवाण माना जाता है। बेडू से अचार,स्क्वैश, जैम और जेली बनाई जाती है। गांव के आसपास बंजर भूमि में उगने वाला बेडू अब पौड़ी जिले के वाशिंदों के लिए रोजगार का जरिया बनेगा। बेडू से पौड़ी जिले में बेडू से अचार,स्क्वैश, जैम और जेली के साथ ही बेहतर किस्म की वाइन (शराब) भी तैयार की जाएगी। इसके लिए कोटद्वार में एक कम्पनी चार करोड़ रुपये की लागत से बेडू का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएगी। इसमे उपयोग होने वाले बेडू को स्थानीय लोगों और महिला सहायता समूहों के माध्यम से बेडू को खरीदा जाएगा। पहले चरण में तीन सौ किलो बेडू की बिक्री के लिए प्रशासन और निजी कंपनी के साथ एमओयू हुआ है। जिलाधिकारी डॉक्टर आशीष चौहान ने बताया कि इससे जिले के करीब एक हजार से अधिक काश्तकारों को लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि रिप (रूरल इंटरप्राइजेज एक्सक्लीरेशन प्रोजेक्ट ) और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में काम करने वाली एक निजी कंपनी के बीच जिले में बेडू के विक्रय को बढ़ावा देने और उसके वैल्यू एडिशन को लेकर समझौता हुआ है। समझौते के अनुसार संबंधित फूड कंपनी कोटद्वार में करीब चार बेडू का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएगी। यह स्थानीय किसानों, काश्तकारों और महिला समूहों द्वारा एकत्रित किए जाने वाले बेडू से वाइन का निर्माण करेगी। कंपनी करीब 4 करोड़ की लागत से प्लांट लागएगी। उन्होंने बताया कि इस साल करीब 300 कुंतल बेडू खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ चौहान ने कहा कि किसानों की उपज को पारदर्शी तरीके से क्रय करने के संबंध में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।
