भाजपा- कांग्रेस के लिए ‘अग्नि परीक्षा’ बागेश्वर उपचुनाव
जनमंच टुडे। देहरादून। बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के विधायक और कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद रिक्त हुई सीट के लिए हो रहे उपचुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। उपचुनाव कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी परीक्षा लेकर आया है, तो वही बीजेपी को भी अपना दबदबा कायम रखने की चुनौती होगी। इस सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पांच सितंबर को 665 वर्ग किलोमीटर में फैला इस निर्वाचन क्षेत्र के 172 मतदान केन्द्रों पर 60 हजार पुरुष और 58 हजार 272 महिला मतदाता प्रत्याशी के भाग्य का फैसला करेंगे। आठ सितंबर को चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा। उपचुनाव के लिए 10 से 17 अगस्त के बीच नामांकन प्रक्रिया होगी और 21 अगस्त को नाम वापसी तिथि मुकर्रर की गई है। बागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के विधायक और कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद रिक्त हुई सीट के लिए राजनीतिक बिसात बिछनी शुरु हो गई है। यह चुनाव सत्तापक्ष और विपक्ष के लिए नाक का सवाल बनी हुई हैं। अभी इस पार्टी से किस पार्टी से कौन चुनाव लड़ेगा, अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन नेताओं ने अपनी महत्वकांक्षा के लिए पाला बदलना शुरू कर दिया है। बागेश्वर विधानसभा सीट से 2022 में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे रंजीत दास ने कांग्रेस का हाथ झटक दिया और कमल का दामन थाम लिया। भाजपा और कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन के लिए मंथन शुरू कर दिया है। वहीं भाजपा की बात की जाए तो पार्टी इस सीट पर सहानुभूति का खेल सकती है । चन्दन रामदास यह से 4 बार विधायक रहे हैं इसके चलते भाजपा चंदन रामदास की पत्नी और बेटों में से किसी एक को टिकट दे सकती है। इसके लिए भाजपा प्रदेश संगठन में मंथन का दौर जारी है। राजनीतिक पंडितों के अनुसार जिस तरह से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रंजीत दास का स्वागत किया इससे रंजीत दास को भी टिकट मिलने की प्रबल संभावना है। वही आपसी कलह से जूझ रही कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव नाक का सवाल बनी हुई है और प्रत्याशी चयन के किए संगठन में मंथन चल रहा है। पूर्व प्रत्याशी रहे रंजीत दास के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस अब पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा को चुनावी रण में उतार सकती है। टम्टा अल्मोड़ा विस क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और उनका मूल गांव बागेश्वर जिले में ही आता है। जिसके चलते रोचक होने की संभावना है। जहां तक बागेश्वर विस उपचुनाव का सवाल है ये चुनाव दोनों पार्टियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बागेश्वर उप चुनाव में जहां भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर होगी, वहीं अंतर्कलह से जूझ रही कांग्रेस के लिए खुद को साबित करने की सबसे चुनौती होगी। दोनों पार्टियां इस उप चुनाव के रन को जीत कर 2024 के लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंकने के साथ ही आगामी नगर निकाय चुनाव में कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाना चाहती है।
