पेट्रोल-डीजल ₹3 और CNG ₹2 महंगी
भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक बदलाव देखा गया। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पिछले चार साल से चले आ रहे ‘प्राइस फ्रीज’ को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। आज सुबह 6:00 बजे से पूरे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं, जबकि सीएनजी (CNG) की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है।
यह निर्णय अप्रैल 2022 से चली आ रही कीमतों की स्थिरता के अंत का प्रतीक है। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के बावजूद, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों को थामे रखा था। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने कच्चे तेल की कीमतों को उस स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां तेल कंपनियों के लिए और घाटा सहना संभव नहीं था।
वैश्विक संकट: $114 प्रति बैरल पर पहुंचा तेल
कीमतों में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। ब्रेंट क्रूड, जो कुछ महीने पहले तक औसतन $69 प्रति बैरल था, अब $107-$114 प्रति बैरल के बीच झूल रहा है। भारत अपनी ज़रूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में भारतीय तेल कंपनियों (IOC, BPCL और HPCL) को इस वृद्धि से पहले हर दिन ₹1,600 करोड़ से अधिक का घाटा हो रहा था।
प्रमुख महानगरों में नई दरें
विभिन्न राज्यों में वैट (VAT) और माल ढुलाई शुल्क अलग-अलग होने के कारण कीमतों में मामूली अंतर है। प्रमुख शहरों की नई दरें नीचे दी गई हैं:
CNG की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि का सीधा असर शहरी परिवहन पर पड़ेगा। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और बसें मुख्य रूप से CNG पर चलती हैं, जिससे किराए में बढ़ोतरी की संभावना प्रबल हो गई है।
प्रभावित क्षेत्र:
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माल ढुलाई: डीजल महंगा होने से सब्ज़ियों, दूध और राशन के सामान की ढुलाई महंगी होगी, जिससे सीधे तौर पर रसोई का बजट बिगड़ेगा।
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सार्वजनिक परिवहन: ओला, उबर और स्थानीय टैक्सी यूनियनों ने संकेत दिया है कि पुराने किराए पर काम करना अब मुमकिन नहीं है।
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कृषि: डीजल से चलने वाले ट्रैक्टरों और सिंचाई पंपों के कारण किसानों की लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों की राय और राजनीतिक घमासान
इस फैसले ने देश में एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जहाँ सरकार इसे तेल कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने के लिए “मजबूरी में उठाया गया कदम” बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे “आम आदमी की जेब पर डाका” करार दिया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पिछले एक महीने में उत्पादन लागत आसमान छू गई है। हमने वैश्विक उथल-पुथल से भारतीय उपभोक्ताओं को बचाने के लिए जितना संभव था, उतना घाटा सहा, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताएं अब और देरी की गुंजाइश नहीं छोड़तीं।” विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रमीत गिल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को संचयी लहरों में प्रभावित कर रहा है, जिसकी शुरुआत ऊर्जा कीमतों से होती है और अंत स्थायी महंगाई के रूप में होता है।
