गलत तरीके से शस्त्र बेचने वाले शस्त्र विक्रेताओं पर होगी कार्रवाई
पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में अवैध शस्त्र लाइसेंसों की रोकथाम तथा शस्त्र नियंत्रण व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शस्त्र लाइसेंसों की निगरानी, अवैध हथियारों एवं गोला-बारूद की बिक्री पर नियंत्रण, शस्त्रागारों की सुरक्षा व्यवस्था तथा ऑनलाइन डाटा प्रबंधन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि जनपद के शस्त्रागारों, विशेष रूप से पौड़ी एवं कोटद्वार स्थित शस्त्रागारों में फायर सेफ्टी, स्टॉक रजिस्टर, प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे एवं सुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासनादेशों के अनुसार शस्त्रागारों में लगे सीसीटीवी कैमरों का कम से कम एक वर्ष का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। बैठक में चोरी-छिपे एवं गलत तरीके से शस्त्र बेचने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार सभी थाना क्षेत्रों में कड़ी कार्रवाई की जाय। जिलाधिकारी ने थाना एवं तहसीलवार शस्त्र लाइसेंस धारकों के यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) का सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं, उनके मामलों की विशेष जांच की जाए तथा सभी अभिलेखों का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी थाने अवैध शस्त्रों के संबंध में नियमित निरीक्षण करेंगे तथा इसकी रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने अवैध शस्त्रों एवं अवैध गोला-बारूद की बिक्री रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।जिलाधिकारी ने वन विभाग को भी निर्देशित किया कि अपने अधीन क्षेत्रों में निरीक्षण कर शस्त्र एवं विस्फोटक सामग्री से संबंधित गतिविधियों की रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराएं। बैठक में सड़क निर्माण कार्यों में उपयोग की जाने वाली विस्फोटक सामग्री के भंडारण एवं बिक्री की संयुक्त जांच करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता न हो।जिलाधिकारी ने शस्त्रागारों का ऑनलाइन डाटा समयबद्ध रूप से अपडेट करने, नवीनीकरण हेतु प्राप्त शस्त्र लाइसेंस आवेदनों का पूर्ण विवरण उपलब्ध कराने तथा सभी रिकॉर्ड को पारदर्शी एवं व्यवस्थित रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
