हथकरघा उद्योग से महिलाओं की आर्थिकी हुई मजबूत
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खटीमा। सरकार महिलाओं को सशक्त करने के लिए उनकी पारंपरिक कला में समय, मांग और बाजार के हिसाब से विविधता लाने के लिए प्रशिक्षण के माध्यम से तैयार कर रही है। इसके तहत खटीमा के बूढ़ाकिशनी गांव की थारू जनजाति की महिलाओं का कढ़ाई और बुनाई में 3 महीने का प्रशिक्षण चल रहा है जिससे उनके द्वारा तैयार उत्पाद की गुणवत्ता में विविधता कर साथ निखार आ सके। जिससे कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी मांग बढ़ सके।
खटीमा जीवनज्योति क्लस्टर की बुक्सा जनजाति की लगभग 25 महिलाएं एनआरएलएम से जुड़कर हथकरघा उद्योग को अपनाते हुए आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है|
मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित करते हुए उत्पाद की गुणवत्ता को बेहत्तर बनाया जा रहा है और उन्हें बाजार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कढ़ाई और बुनाई के क्षेत्र में अल्मोड़ा कि बेहत्तर महिला प्रशिक्षक के माध्यम से खटीमा में समूह की लगभग 25 महिलाओं को 3 महीने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है| जिससे कि उनके कौशल का बेहत्तर विकास हो और उनमें विविधता आये जिससे उनके द्वारा बनाई गई शॉल की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़े। उन्होंने कहा कि आने वाले समय मे हैंडलूम उद्योग को बेहत्तर करने के लिए इस तरह के और प्रशिक्षणों का आयोजन किया जाएगा।
एकता ग्राम संगठन की अध्यक्ष कमला गोस्वामी ने बताया कि हमारे संगठन में पांच समूह है जिससे लगभग 50 महिलाएं जुड़ी हुई हैं| उन्होंने बताया कि गांधी जी के हथकरघे के सपनों को आगे बढ़ाते हुए हमारे हरियाली स्वयं सहायता समूह की महिलाएं चटाई,मेजपोश,स्टाल के साथ ही शॉल बना रही है। उन्होंने बताया कि शासन के सहयोग से महिलाओं में कौशल विकास को लेकर कढ़ाई बुनाई में पारंगत महिलाओं के द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले महिलाएं घर से बाहर तक नही निकलती थी लेकिन आज सरकार के सहयोग से वे आत्म निर्भरता की तरफ तेजी से बढ़ रही है। सरकार के महिला सशक्तिकरण मुहिम ने महिलाओं को प्रोत्साहित किया है जिससे महिलाएं समूह के माध्यम से काम कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। हरियाली सहायता समूह की महिला सदस्य ममता देवी का कहना है कि सरकार ने बहुत अच्छी पहल की है। जो महिलाएं पहके घर से बाहर नहीं निकलती थी वो आज गांव में ही अपना रोजगार कर रही हैं और अपने परिवार की आय में हिस्सेदारी दे रहीं हैं। उन्होंने बताया कि जो महिलाएं पहले अपने पति पर निर्भर रहती थी आज आपने आत्म सम्मान को बढ़ाते हुए आर्थिक रूप से आत्म निर्भर हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार समय समय पर प्रशिक्षण दे महिलाओं के हूनर में रंगत लाने का कार्य कर रही है जिससे महिलाओं के द्वारा बनाये गए उत्पाद की गुणवत्ता में निखार आ रहा है और बाजार में मांग बढ़ रही है।
