पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा : धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने  कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विकसित उत्तराखण्ड की आधारशिला हैं। राज्य सरकार उत्तराखण्ड को अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीकी विकास का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि विज्ञान को प्रयोगशालाओं और पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय आमजन के जीवन से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व की प्रगति प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की क्षमता से निर्धारित हो रही है। उन्होंने कहा कि AI, रोबोटिक्स, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीकें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही हैं। इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प की आधारशिला विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे अभियान भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनाना है। उन्होंने कहा कि देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है, जो उत्तराखण्ड को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के स्कूली विद्यार्थियों का नियमित रूप से साइंस सिटी भ्रमण कराया जाए, ताकि उनमें विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना विकसित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, GIS आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर तथा स्टेम लैब्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही AI, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, प्री-इन्क्यूबेशन लैब्स तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में वैश्विक स्तर के अवसर उपलब्ध हो सकें।

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