राह तकते, तकते थक गई ग्वास के ग्रामीणों की आंखें

ऊखीमठ। पट्टी तल्ला नागपुर की सीमान्त ग्राम पंचायत घिमतोली के ग्वास गाँव के ग्रामीणों का 22 वर्षों बाद भी विस्थापन न होने से ग्रामीण आज भी जीवन व मौत के साये में जीवन यापन करने को विवश है। बरसात के समय व आसमान में बादलों के गर्जन से ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ जाती है ।  ग्रामीण विगत 22 वर्षों से विस्थापन करने की मांग करते आ रहे है मगर सरकारी हुक्मरानों की अनदेखी के कारण ग्रामीणों का आज तक विस्थापन नहीं हो पाया है जिससे ग्रामीणों में शासन – प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है। बता दे कि 28 मार्च 1998 को हिमालयी क्षेत्रों में विनाशकारी भूकंप आने से कुछ गांवों को भारी नुकसान हुआ था तथा तल्ला नागपुर की ग्राम पंचायत घिमतोली के ग्वास गाँव के ऊपरी हिस्से में दरार पड़ने तथा बड़े – बड़े बोल्डरो से गाँव को खतरा उत्पन्न हो गया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने गाँव के ऊपरी हिस्से में पडी़ दरार का निरीक्षण कर ग्रामीणों को गाँव छोड़ने का फरमान जारी किया था। तहसील प्रशासन का फरमान जारी होते ही ग्रामीणों गाँव छोडक खेतों में खुले आसमान में रात्रि गुजारने को विवश हो गये थे! 22 वर्षों का समय गुजर जाने के बाद भी ग्रामीणों का विस्थापन न होने से ग्रामीण आज भी जीवन व मौत के सांये में जीवन यापन करने को विवश बने हुए है। बरसात के समय व आसमान में बादलों के गरजने की रातो की नींद हराम होना स्वाभाविक ही है! क्षेत्र पंचायत सदस्य घिमतोली अर्जुन सिंह नेगी ने बताया कि गाँव के ऊपरी के बड़े वोल्डरो से गाँव को खतरा बना हुआ है ग्रामीणों के हित को देखते हुए बोल्डरो का निस्तारण किया जाना चाहिए। नव युवक मंगल दल अध्यक्ष दीपक नेगी ने बताया कि बरसात के समय गाँव को अधिक खतरा बना रहता है।

लक्ष्मण सिंह नेगी, वरिष्ठ पत्रकार, ऊखीमठ।

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