‘पंचायत 5’ की शूटिंग शुरू
भारतीय डिजिटल मनोरंजन जगत (OTT) के प्रशंसकों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) और मशहूर प्रोडक्शन हाउस ‘द वायरल फीवर’ (TVF) ने आधिकारिक तौर पर अपनी सुपरहिट वेब सीरीज ‘पंचायत’ के पांचवें सीजन (Panchayat Season 5) की शूटिंग शुरू होने की घोषणा कर दी है। यह घोषणा शो के पहले सीजन की रिलीज के पूरे 6 साल पूरे होने के ऐतिहासिक मौके पर की गई है, जिसने सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के बीच उत्सुकता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
वर्ष 2020 में अपनी शुरुआत के बाद से, ‘पंचायत’ केवल एक शो नहीं बल्कि भारतीय ग्रामीण जीवन, स्थानीय राजनीति और जमीनी स्तर के प्रशासनिक संघर्षों को दर्शाने वाला एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है। निर्माण से जुड़े अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के वास्तविक ‘महौदिया गांव’ (जो पर्दे पर फुलेरा कहलाता है) में अप्रैल 2026 के शुरुआती सप्ताह से ही कैमरे रोल होना शुरू हो चुके हैं। निर्माताओं की योजना इस सीजन को कई कड़े शेड्यूल में पूरा करने की है, और उम्मीद की जा रही है कि साल 2026 के अंत तक इस बहुप्रतीक्षित शो को अमेज़न प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम कर दिया जाएगा।
सीजन 4 के अनसुलझे रहस्य और फुलेरा की नई राजनीति
‘पंचायत’ का आगामी पांचवां सीजन कहानी के उस मोड़ से शुरू होगा जहां चौथा सीजन एक बेहद तनावपूर्ण और भावनात्मक राजनीतिक मोड़ पर समाप्त हुआ था। शो के शुरुआती सीजन जहां हल्के-फुल्के हास्य और ग्रामीण जीवन की सरलता पर आधारित थे, वहीं अब यह श्रृंखला एक गंभीर और रणनीतिक राजनीतिक ड्रामे का रूप ले चुकी है। इस बार फुलेरा गांव के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं।
पिछले सीजन के अंत में हुए पंचायत चुनावों में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। लंबे समय से गांव की प्रधान रहीं मंजू देवी और उनके पति ब्रजभूषण दुबे (प्रधान जी) को ‘बनराकस’ (भूषण) और क्रांति देवी के गुट के हाथों मात्र 73 वोटों के मामूली अंतर से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। प्राइम वीडियो द्वारा जारी की गई शुरुआती झलकियों के अनुसार, सीजन 5 में ‘सचिव जी’ यानी अभिषेक त्रिपाठी को गांव की इस नई, आक्रामक और प्रतिशोधी स्वभाव वाली राजनीतिक सत्ता के अधीन एक बेहद कठिन और तनावपूर्ण माहौल में काम करना होगा।
इसके साथ ही, मुख्य किरदारों की व्यक्तिगत जिंदगी भी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। लंबे समय की कड़ी मेहनत के बाद, अभिषेक त्रिपाठी ने 97 प्रतिशत (97%) अंकों के साथ कैट (CAT) परीक्षा पास कर ली है, जो उन्हें उनके पुराने सपने यानी एमबीए (MBA) करके फुलेरा से बाहर निकलने के बेहद करीब ले आई है। हालांकि, गांव के लोगों के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव और प्रधान जी की बेटी ‘रिंकी’ के साथ उनके प्यार का इजहार, उनके इस फैसले में एक बड़ी रुकावट बन गया है। अभिषेक अब फुलेरा छोड़ने से पहले गांव के इन अनसुलझे राजनीतिक और व्यक्तिगत मुद्दों को हमेशा के लिए सुलझाना चाहते हैं।
पुरानी स्टार कास्ट की वापसी और मुख्य कलाकार
फुलेरा गांव की उसी पुरानी सादगी, देसी हास्य और भावनात्मक गहराई को पर्दे पर बनाए रखने के लिए मेकर्स ने सभी पुराने और पसंदीदा कलाकारों को इस सीजन में भी बरकरार रखा है। दर्शकों को एक बार फिर अपनी पसंदीदा चौकड़ी और उनके विरोधियों को आमने-सामने देखने का मौका मिलेगा:
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जितेन्द्र कुमार (अभिषेक त्रिपाठी / सचिव जी)
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नीना गुप्ता (मंजू देवी / पूर्व प्रधान)
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रघुबीर यादव (ब्रजभूषण दुबे / प्रधान पति)
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फैसल मलिक (प्रह्लाद चा)
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चंदन रॉय (विकास शुक्ला)
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सांविका (रिंकी दुबे)
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सुनीता राजवार (नवनिर्वाचित प्रधान, क्रांति देवी)
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दुर्गेश कुमार (भूषण शर्मा / बनराकस)
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पंकज झा (विधायक चंद्र किशोर सिंह)
इस लोकप्रिय सीरीज के लेखन का जिम्मा एक बार फिर चंदन कुमार के कंधों पर है, जिन्होंने इसके पिछले सभी सफ़ल सीजनों की स्क्रिप्ट लिखी है। वहीं, निर्देशन की कमान दीपक कुमार मिश्रा संभाल रहे हैं, जिन्हें ग्रामीण भारत की नब्ज को कैमरे के जरिए पर्दे पर उतारने में महारत हासिल है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म और ग्रामीण कहानियों का बढ़ता प्रभाव
‘पंचायत सीजन 5’ के साथ-साथ टीवीएफ के अन्य शो जैसे ‘संदीप भैया’ और ‘ग्राम चिकित्सालय’ के नए सीजनों की घोषणा यह साबित करती है कि भारतीय डिजिटल मनोरंजन बाज़ार में एक बड़ा बदलाव आया है। अब वैश्विक स्ट्रीमिंग कंपनियां बड़े शहरों की क्राइम-थ्रिलर कहानियों के बजाय भारत के कस्बों और गांवों से जुड़ी वास्तविक, जड़ों से जुड़ी कहानियों (Rooted Content) पर भारी निवेश कर रही हैं।
टीवीएफ के क्रिएटिव और कंटेंट डेवलपमेंट विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ निर्माता ने सीजन 5 की पटकथा और इसकी वैचारिक गहराई पर बात करते हुए बताया, “सीजन 5 के साथ हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य यह है कि हम कहानी में नए प्रशासनिक और राजनीतिक ट्विस्ट लेकर आएं, लेकिन साथ ही फुलेरा की उस मूल आत्मा और हास्य के सहज प्रवाह को भी बचाए रखें। चुनाव में मिली हार के बाद गांव का माहौल पूरी तरह से ध्रुवीकृत (Polarized) हो चुका है, जिसने हर किरदार के आपसी संबंधों को बदल दिया है। अमेज़न प्राइम वीडियो के साथ हमारा यह सहयोग हमें एक ऐसा रचनात्मक संसार बनाने की आजादी देता है, जहां हास्य जबरदस्ती थोपा हुआ नहीं लगता, बल्कि ग्रामीण भारत की प्रशासनिक व्यवस्था और मानवीय संघर्षों को पूरी सच्चाई और तकनीकी सटीकता के साथ प्रस्तुत किया जाता है।”
