प्रकृति का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता : धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर के फांटो जोन में आयोजित नेचर गाइड प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। इस अवसर पर 180 महिला एवं पुरुष नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये प्रमाण-पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि युवाओं के कौशल, मेहनत और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्हें विशेष प्रसन्नता है कि प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले अनेक युवा रिवर्स पलायन कर अपने गांव और प्रदेश लौटे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि फांटो जोन आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म और समुदाय आधारित पर्यटन का उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता, घने वन, शांत वातावरण और वन्यजीव देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फांटो जोन टाइगर साइटिंग के लिए भी तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां विकसित ट्री हाउस पर्यटकों को प्रकृति के बीच अनूठा अनुभव प्रदान कर रहा है और पर्यटन गतिविधियों से प्रदेश को राजस्व प्राप्त होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रकृति का संरक्षण हो और प्रकृति से जुड़े स्थानीय समुदायों का जीवन भी समृद्ध बने। ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, होमस्टे संचालकों, छोटे व्यापारियों, वाहन चालकों, स्थानीय उत्पाद निर्माताओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह संतोष का विषय है कि उत्तराखंड ने विकास, सुशासन, रोजगार सृजन और जनकल्याण के क्षेत्र में अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। ईको-टूरिज्म और नेचर गाइड जैसी पहलें स्थानीय युवाओं को उनके गांवों में सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से राज्य सरकार पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि तक सीमित न रखकर रोजगार, स्वरोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रिवर्स पलायन से जोड़ने का कार्य कर रही है। होमस्टे, शीतकालीन पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, डेस्टिनेशन वेडिंग और आध्यात्मिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड के गांव अब केवल पुरानी यादों के नहीं, बल्कि नई संभावनाओं के भी केंद्र बन रहे हैं।1 मुख्यमंत्री ने नेचर गाइडों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल पर्यटकों को जंगल घुमाने तक सीमित नहीं है। वे उत्तराखण्ड की पहचान, जंगलों के प्रहरी, वन्यजीव संरक्षण के सहयोगी और प्रदेश की संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि देवो भवः की भावना के ब्रांड एम्बेसडर हैं। मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों और प्रदेशवासियों से प्रकृति एवं वन्यजीवों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता, गांवों की समृद्धि और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन अधिकारी, जनप्रतिनिधि, नेचर गाइड तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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