अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

रुद्रपुर।  जो जैसा करता है, उसकी सजा उसको यही भुगतनी पड़ती है। ट्रांजिट कैंप में नाबालिग बालक से कुकर्म और उसकी हत्या के मामले में स्पेशल पॉस्को न्यायाधीश ने  अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई। वहीं अभियुक्त के मां-बाप को साक्ष्य छुपाने का दोषी पाते हुए  उन्हें भी सजा सुनाई है।

जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता विकास गुप्ता ने बताया कि 19 फरवरी 2019 को ट्रांजिट कैंप निवासी एक परिवार का पांच साल का नाबालिग छत पर खेलते हुए लापता हो गया था। काफी खोजबीन के बाद भी बालक का कोई सुराग नहीं लगा। परिजनों ने 21 फरवरी को थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक इसी दौरान परिजनों ने पड़ोसी पप्पू,रुपवती व हरस्वरुप के व्यवहार में तब्दीली देखने की बात पुलिस को बताई। साथ ही रात को छत पर आवाज होने के बाद उन्होंने पड़ोसी युवक हरस्वरुप को भागता हुए देखने का संदेह भी जताया। पुलिस ने आरोपी हरस्वरुप को हिरासत में लेकर पूछताछ की और आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने छत की टंकी से नाबालिग का शव व कमरें से कपडे बरामद किया।  पुलिस ने तीनों  को गिरफ्तार कर लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नाबालिग बालक के साथ कुकर्म के बाद गला दबाकर हत्या करने की  पुष्टि हुई। इसके बाद कुकर्म व हत्याकांड की सुनवाई स्पेशल पॉस्को न्यायाधीश विजय लक्ष्मी विहान की अदालत में प्रारंभ हुई। इस पूरे मामले में न्यायालय में जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता विकास गुप्ता ने अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह पेश किए।

साथ ही इस जघन्य हत्याकांड व क्रूरता के लिए न्यायालय से अभियुक्त हरस्वरुप को फांसी देने की मांग की। जिस पर न्यायालय ने हरस्वरुप को फांसी की सजा सुनाई। साथ ही साक्ष्यों को छुपाने के लिए अभियुक्त की मां रुपवती को तीन साल और पिता पप्पू को चार साल की सजा सुनाई। दोनों को कुल पंद्रह हजार का अर्थदंड भी किया।

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