क्षमता से अधिक आक्सीजन उत्पादन, फिर भी दूसरे राज्यों से हो रही सप्लाई

जनमंच टुडे/देहरादून।

राज्य में तेज़ी से फैल रहे कोरोना संक्रमण के चलते लगातार लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं, हर दिन एक्टिव केस की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा मंगलवार को जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार  पूरे प्रदेश में 76,500 एक्टिव केस है इनमे से बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज आक्सीजन सपोर्टेड बेड और आइसीयू में भर्ती हैं।राज्य में भले ही हर दिन 300 मीट्रिक टन से अधिक आक्सीजन तैयार हो रही है, उसके बावजूद  उत्तराखंड दूसरे राज्यों से आक्सीज मंगवा रहा है। आप सोच रहे होंंगे। इतनी आक्सीजन तैयार हर दिन तैयार होने के बावजूद  उत्तराखंड  आक्सीजन सप्लाई के लिए दूसरे राज्यों की ओर देखना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के लिए आक्सीजन का कोटा तय कर दिया है। ऐसे में उत्तराखंड में बन रही ऑक्सीजन उत्तराखंड के बजाय दूसरे राज्यों को आपूर्ति करनी पड़ रही है, और  उत्तराखंड को अपने लोगों के लिए अन्य राज्यों से आक्सीजन लेनी पड़ रही है। उत्तराखंड  के अस्पतालों में भर्ती मरीजों के अनुपात में प्रदेश में आक्सीजन की कमी नहीं है, लेकिन भविष्य में यदि मरीजों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो फिर आक्सीजन को लेकर समस्या खड़ी हो सकती है। उत्तराखंड में इस समय आक्सीजन सपोर्टेड बेड में 10 लीटर प्रति मिनट और आइसीयू बेड में 24 लीटर प्रति मिनट के हिसाब से सप्लाई होनी चाहिए। अभी प्रदेश में 5500 आक्सीजन सपोर्टेड बेड, 1390 आइसीयू और 876 वेंटिलेटर हैं। इनके हिसाब से उत्तराखंड को प्रतिदिन 165.18 मीट्रिक टन आक्सीजन की जरूरत है। मौजूदा समय मे प्रदेश में कुल उपलब्ध बेड के सापेक्ष अभी जो बेड फुल हैं, उसके लिए प्रतिदिन 130 मीट्रिक टन आक्सीजन की जरूरत है। प्रदेश के पास अभी 126 मीट्रिक टन आक्सीजन उपलब्ध है। इसके  अलावा अस्पतालों में लगे आक्सीजन प्लांट से पांच मीट्रिक टन आक्सीजन मिल रही है, जिससे मौजूदा जरूरत पूरी हो रही है।  उत्तराखंड के लिए केंद्र सरकार ने 183 मीट्रिक टन का कोटा तय किया हुआ है। इसमें से भी 60 मीट्रिक टन आक्सीजन उत्तराखंड को दूसरे राज्यों से लेनी है। इसमें 40 मीट्रिक टन जमशेदपुर, झारखंड और 20 मीट्रिक टन दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल से मिलेगी। इस आक्सीजन की लगातार सप्लाई के लिए प्रदेश सरकार को 12 कंटेनर चाहिए। जबकि प्रदेश में अभी केवल दो ही ऑक्सीजन कंटेनर उपलब्ध हैं। ऐसे में  उत्तराखंड को इन राज्यों से आक्सीजन  लाना भी एक चुनौती बनी हुई है।

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