डीएम ने लिया आपदा की घटनाओं से निपटने के लिए की गई तैयारियों का जायज़ा

जनमंच टुडे/ पौड़ी।

जिलाधिकारी  डॉ विजय कुमार जोगदण्डे के दिशा निर्देश पर बुधवार को जनपद मुख्यालय पर आपदा से पूर्व तैयारी को लेकर एक दिन का पूर्वाभ्यास किया गया । मॉकड्रिल कार्यक्रम के तहत कंडोलिया मैदान पर स्टेजिंग एरिया बनाया गया, जहां से तीन स्थानों पर घटित तीन विभिन्न घटनाओं का सीनरियों बनाकर अभ्यास किया गया ।
पूर्वाभ्यास से पहले जिलाधिकारी डा जोगदण्डे एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी. रेणुका देवी ने स्टेजिंग एरिया का निरीक्षण कर मौजूद उपकरण की जानकारी लेते हुए, मॉक ड्रिल के लिए तैयार टीम के तीनों इंसीडेन्ट कमाण्डर से राहत एवं बचाव के कार्यो के बारे में जानकारी ली और  कार्य संपादन के महत्वपूर्ण टिप्स दिये।

जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी एवं जिला सूचना अधिकारी आपदा परिचाल कन्ट्रोल रूम पौड़ी पहुंचे जहां उन्होने स्पाॅट से आने वाले सूचना एवं संपादित कार्यो के बारे में जानकारी ली, जबकि जिलाधिकारी ने राहत एवं बचाव कार्यो की समय समय पर नवीनतम जानकारी लेते हुए, आवश्यक दिशा निर्देश दिये। वहीं स्टेजिंग एरिया को कमान अपर जिलाधिकारी ने संभालते हुए माॅकड्रिल कार्य को सफलता पूर्वक संपादित किया।


जिलाधिकारी डा जोगदण्डे एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी रेणुका देवी एवं संबंधित अधिकारी मॉकड्रिल कार्यक्रम के समापन अवसर पर कंडोलिया मैदान पर पहुंचे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने डा जोगदण्डे कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा के दृष्टिगत संवेदनशीलता बनी रहती है, जिसके क्रम में घटनाओं को लेकर मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य  जिला प्रशासन के साथ विभिन्न विभाग की आपदा घटनाओं से निपटने के लिए कितनी तैयारी है को परखना है। उन्होंने कहा कि मॉकड्रिल के द्वारा यह पता आसानी से लगाया जा सकता है कि प्रशासन के पास कितने अधिकारी रिस्पांस अफसर के रूप में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि मैन पावर के साथ-साथ आपदा राहत कार्यों के बचाव के लिए उपकरण अपग्रेड हैं या नहीं।  उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास कितने टीम लीडर है जो आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य को आसानी से संपादित कर सकेंगे। उन्होने आवश्यक उपकरणों की सूची बनाकर अपर जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्यों में सबसे ज्याद परेशानी घटना स्थल तक पहुंचने में होती है।

यही नहीं घटना स्थल तक पहुंचने के बाद राहत कार्य में जुटी टीम के सामने सबसे बड़ी समस्या वहां पर बुनियादी सुविधाओं को जुटाना है। जिसमें सबसे अधिक समय लगता है। कहा कि आपदाओं की घटना के समय मोबाइल फोन के बजाए रेडियो सेट का उपयोग किया जाना आवश्यक है। कहा कि टीम लीडर अपनी अपनी टीमों का पहचान करने के लिए ड्रेस कोड का आवश्यक रूप से इस्तेमाल करें। यही नहीं उन्होंने कहा कि राहत बचाव टीम को आई कार्ड और उसमें उस व्यक्ति की जिम्मेदारी अवश्य अंकित की जानी चाहिए। राहत और बचाव कार्य में तैनात अधिकारियों को जिम्मेदारी के अनुसार ही उन्हें घटनास्थल पर तैनात किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर पहुंचने के लिए इंसीडेंट कमांडर की जिम्मेदारी सबसे अहम है। घटनास्थल पर कितने लोगों की आवश्यकता है इसी के अनुसार टीम का गठन किया जाना चाहिए। इंसिडेंट कमांडर को घटनास्थल पर पहुंचकर जरूरी उपकरणों के साथ मैन पावर की जरूरत के अनुसार ही टीम का बैकअप तैयार किया जाना चाहिए। तभी राहत और बचाव कार्य के लिए संचालित अभियान सफल हो पाएगा।


जिलाधिकारी डा जोगदण्डे ने नगरपालिका वन विभाग राजस्व ग्राम पंचायत व पंचायत राज विभाग को हर ग्राम पंचायत में आपदा के राहत व बचाव उपकरणों के लिए एक डिपो तैयार करने के निर्देश। जिसमें गैंती, फावड़ा, स्टेचर, टैंट लाइट, टोर्च आदि उपकरणों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की मॉक ड्रिल में बेहतरीन कार्य करने वाले कर्मचारियों को दूसरी मॉक ड्रिल में और अधिक बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने अपर जिलाधिकारी को जनपद में सभी इंसिडेंट कमांडरों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। जिससे योग्य और कुशल अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों के लिए इंसीडेंट कमांडर के तौर पर चयनित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनपद के पुलिस विभाग के क्षेत्राधिकारी, निरीक्षक व उपनिरीक्षक, तहसीलदार, ई.ई. व एई लोनिवि समेत आदि विभागों के अधिकारियों को इंसिडेंट कमांडर के रूप में तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दूसरी मॉक ड्रिल में लैंसडाउन के आर्मी जवानों को भी शामिल किया जाएगा।


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी. रेणुका देवी ने आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राहत और बचाव कार्यों में आपसी समन्वय का होना जरूरी है। जिससे टीम भावना के साथ सौंपे गए दायित्व को सफलता से हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल आपदा की घटनाओं में राहत और बचाव कार्यों को ओर अधिक सुगमता से करने के लिए किया जाता है। इसी के तहत जरूरी उपकरणों और मेन पावर की भली-भांति परीक्षा भी होती है। साथ ही उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के माध्यम से अपनी कमियों को भी दूर करने अवसर भी मिलता है।


इस अवसर पर डीएफओ मुकेश शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी आशीष भटगांई, अपर जिलाधिकारी डा0 एस के बरनवाल, मुख्य चिकित्साधिकारी डा मनोज शर्मा, जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, आपदा प्रबंधन अधिकारी दिपेश चन्द्र काला, डीपीआरओ एम.एम. खान, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 अशोक तोमर और उपजिलाधिकारी सदर श्याम सिह राणा सहित अन्य विभागों अधिकारी कर्मचारी व तीनों टीम के इंसिडेट कमाण्डर सहित दल उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed