मक्कूमठ में 18 वर्षों बाद निकली दिव्य जलकलश यात्रा
लक्ष्मण सिंह नेगी।
जनमंच टुडे/ ऊखीमठ।
पंच केदार में तृतीय केदार के नाम से विख्यात भगवान तुंगनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल मर्कटेश्वर तीर्थ मक्कूमठ में 18 वर्षों बाद मन्दिर समिति व ग्राम पंचायत मक्कू, पावजगपुडा के सयुंक्त तत्वावधान में आयोजित 11 दिवसीय महायज्ञ और महा शिवपुराण कथा के 10 वें दिन 251 जल कलश से भव्य व दिव्य जल कलश यात्रा निकाली गई जिसमें 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शामिल होकर पुण्य अर्जित किया।
कलश यात्रा के आयोजन, विद्वान आचार्यों के वेद ऋचाओं के उदघोष, भक्तों के जयकारों, महिलाओं के मांगल गीतों, 11 मराठा रेजिमेंट की बैण्ड व स्थानीय वाध्य यंत्रों की मधुर धुनों से मक्कूमठ सहित तुंगनाथ घाटी का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। जल कलश यात्रा के बाद विद्धान आचार्यों ने हवन कुंड में हजारों आहूतियां डालकर विश्व शान्ति व समृद्धि की कामना की, तथा विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया! सोमवार को पूर्णाहुति के साथ 11 दिवसीय महायज्ञ व शिव महापुराण कथा का समापन होगा। रविवार को ब्रह्म बेला पर विद्धान आचार्यों ने पंचाग पूजन के तहत भगवान तुंगनाथ सहित तैतीस कोटी देवी – देवताओं का आवाहन किया।
ठीक दस बजे भगवान तुंगनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल मर्कटेश्वर तीर्थ मक्कूमठ से भक्त गांजे – बाजों के साथ सेम नामक प्राकृतिक जल स्रोत के लिए रवाना हुए तथा सेम नामक प्राकृतिक जल स्रोत पहुंचने पर विद्वान आचार्यों ने अनेक पूजाये समपन्न कर हवन किया तथा 251 जल कलशो से सजी भव्य जल कलश यात्रा की आरती उतारी! निर्धारित समय पर जल कलश यात्रा महायज्ञ व कथा स्थल के लिए रवाना हुई तो हजारों भक्तों की जयकारों से सम्पूर्ण भूभाग गुजायमान हो उठा! हजारों भक्तों ने पुष्प, अक्षत्रो, विद्धान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारण तथा महिलाओं ने मांगल गीतों से जल कलश यात्रा की अगुवाई की! जल कलश यात्रा के सीढीनुमा खेत खलिहानों के मध्य भूतनाथ मन्दिर पहुंचने पर हजारों भक्तों ने जल कलश यात्रा का जय माँ गंगे के जयकारों से भव्य स्वागत किया! दोपहर 1:30 बजे जल कलश यात्रा के मर्कटेश्वर तीर्थ पहुंचने पर जल कलश यात्रा ने मुख्य मन्दिर सहित कथा व यज्ञ स्थल की परिक्रमा करने के बाद प्रधान जल कलश से भगवान तुंगनाथ और व्यास पीठ का जलाभिषेक किया गया। शेष कलशों का जल भक्तों को प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। कथावाचक लम्बोदर प्रसाद मैठाणी ने जल कलश यात्रा की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि तीर्थ स्थलों में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान निकलने वाली जल कलश यात्रा के दर्शन मात्र से मनुष्य के जन्म – जन्मान्तरों से लेकर युग – युगान्तरो के पापों का हरण हो जाता है। इस अवसर पर ऋषि भक्त मणडली व बाबा केदारनाथ दास सेवा मण्डल अगस्तमुनि के सयुक्त तत्वावधान में तुंगनाथ धाम के परम साधक ब्रह्मलीन किडिकबम की पुण्य स्मृति में विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों भक्तों ने प्रतिभाग किया।
इस मौके पर मन्दिर समिति सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, दिवारा यात्रा अध्यक्ष भूपेन्द्र मैठाणी, आचार्य नवीन देवशाली, ब्रह्मा प्रकाश चन्द्र मैठाणी, प्रभारी कार्यधिकारी आर सी तिवारी, सुपरवाइजर यदुवीर पुष्वाण , महायज्ञ प्रभारी प्रकाश पुरोहित ,मठापति राम प्रसाद मैठाणी, प्रबन्धक बलवीर सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य परकण्डी रीना बिष्ट, प्रधान मक्कू विजयपाल नेगी, पावजगपुडा अरविन्द रावत, क्षेत्र पंचायत सदस्य जयवीर नेगी, सतीश मैठाणी, मोहन प्रसाद मैठाणी, जीतपाल भण्डारी, कुवर सिंह नेगी, गौरव कठैत, धीर सिंह नेगी, विजयपाल राणा, सन्दीप बेजवाल, देवानन्द गैरोला, सतीश भटट्, नरेन्द्र नेगी, नागेन्द्र भटट् हवलदार सन्दीप पाटिल सहित विद्वान आचार्य , तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों के जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, 11 मराठा रेजिमेंट का 17 सदस्यीय दल व कई हजारों भक्त मौजूद थे।
