हाई ब्लड प्रेशर बना ‘साइलेंट किलर’, युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा खतरा
नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की है। देश में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और अनुमान के अनुसार 20 करोड़ से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं। चिंताजनक बात यह है कि हाई बीपी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं में भी यह आम होता जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक हाइपरटेंशन को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते। लेकिन समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो यह हृदय, मस्तिष्क और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
नमक का सीमित सेवन जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए नमक का सेवन कम करना सबसे अहम कदम है। अधिक सोडियम शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाता है, जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है। प्रतिदिन 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन न करने और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने की सलाह दी गई है।
व्यायाम और वजन नियंत्रण पर जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि से रक्तचाप को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलना, योग या हल्का व्यायाम करने से हृदय मजबूत होता है। साथ ही वजन संतुलित रहने पर हाई बीपी का खतरा भी कम हो जाता है।
तनाव और नींद भी अहम कारक
लगातार तनाव और नींद की कमी भी ब्लड प्रेशर बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है। विशेषज्ञ मेडिटेशन, प्राणायाम और गहरी सांस की तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेने से शरीर को आराम मिलता है और बीपी नियंत्रित रहता है।
खानपान में करें बदलाव
डाइट को लेकर डॉक्टर पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों जैसे केला, पालक और शकरकंद को शामिल करने की सलाह देते हैं। DASH डाइट को हाई बीपी के मरीजों के लिए प्रभावी माना जाता है। साथ ही नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराने पर भी जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और समय पर सावधानी ही हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्या से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। नए साल में स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस ‘साइलेंट किलर’ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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