जब कैबिनेट मंत्री के भांजे को दिनभर नहीं मिला बेड
जनमंच टुडे/ देहरादून।
देहरादून में अस्पतालों में हालत इतने खराब हो चुके हैं कि हरक सिंह रावत का करोना संक्रमित भांजा दिनभर आईसीयू बेड के लिए सारा दिन घूमता रहा, हैक सिंह रावत ने खुद बेड दिलाने के लिए मोर्चा संभाला और ऋषिकेश एम्स से लेकर दून के तमाम बड़े, छोटे अस्पताल के मैनेजरों यहां तक कि उनके मालिकों तक को फोन किए उसके बावजूद उनके भांजे को बेड नही मिल पाया। सुबह से इधर उधर भटकने के बाद शाम को बामुश्किल एक निजी अस्पताल में बेड की व्यवस्था हो पाई। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब प्रदेश के एक दिग्गज नेता के रिश्तेदार को स्वयं मंत्री के फ़ोन, पर, फोन करने के बावजूद बेड नही मिला तो आम आदमी की क्या दशा होगी। हरक सिंह रावत के अनुसार उनके कोटद्वार में रहने वाले भांजे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जब उसका ऑक्सीजन लवेबल कम होने लगा तो उसे डिफेंस कालोनी के मंत्री के आवास पर आइसोलेशन पर रखा गया, लेकिन उसकी तबियत अधिक खराब होने पर उसे आईसीयू में भर्ती करने को कहा गया। उन्होंने सुबह से लेकर शाम चार बजे तक हर जगह फोन किया लेकिन कहीं बेड नही मिला। उन्होंने दून के सभी बड़े, छोटे अस्पतालों को स्वयं फोन किया, यहां तक कि उनके मालिकों को भी फोन घनघनाने, उसके बावजूद उनके भांजे को आईसीयू बेड नही मिलाऔर शाम को एक निजी अस्पताल में बामुश्किल बेड की व्यवस्था हो पाई। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अफसरों के कर्मठता के कारण ऐसा हो रहा है। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है।
जहां एक ओर सरकार दावे कर रही है कि बप्रदेश में हर सुविधाएं उपलब्ध है, जनता को किसी भी प्रकार सी परेशानी नही होगी, लेकिन सवाल यह उठता है कि जब दिग्गज नेता के भांजे तक को बेड नहीं मिल पाया तो आमजन को मिल पाएगा। जन हरक सिंह जैसे नेता ने खुद अपने कोरोना संक्रमित भांजे को अस्पताल में एडमिट करना चाहा तो उनको किसी भी अस्पताल में बेड नहीं मिल पाया आवर
