गढ़वाल कमिश्नर की निगरानी में होगी स्वर्ण मण्डित मामले की जांच : महाराज
जनमंच टुडे। देहरादून। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि स्वर्ण मण्डित केदारनाथ मंदिर गर्भ गृह की जांच गढ़वाल कमीशनर की निगरानी में होगी। महाराज ने कहा कि जांच कमेटी में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ सुनार(ज्वेलर) को भी किया जायेगा शामिल किया जाएगा। पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह को स्वर्ण मण्डित करने से उठे विवाद और अफवाहों को विराम लगाते हुए सचिव धर्मस्व को निर्देश देकर गढ़वाल कमीशनर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर मामले की तह तक पहुंचने के निर्देश दिए हैं। धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह को स्वर्ण मण्डित करने से उठे विवाद और अफवाहों को विराम लगाते हुए सचिव धर्मस्व को निर्देश देकर गढ़वाल कमीशनर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। जांच कमेटी में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ सुनार को भी शामिल करने की बात कही है। महाराज ने कहा कि विपक्षी दल आस्था से जुड़े इस मामले को अनावश्यक तूल देकर चारधाम यात्रा में खलल डालने की कुचेष्ठा कर रहा है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल कमीशनर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं और जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी। महाराज ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले को लेकर बेहद संवेदनशील है। धर्मस्व मंत्री ने कहा कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ही दानदाता से दान स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित करने के लिए प्रदेश शासन से अनुमति ली गई। महाराज ने कहा कि भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण विभाग के विशेषज्ञों की देख-देख में ही स्वर्ण मंडित करने का कार्य किया गया था। बीकेटीसी द्वारा केदारनाथ मन्दिर के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने की अनुमति दानदाता की भावना के अनुरूप दी गई। मीडिया सलाहाकार निशीथ सकलानी की ओर जारी प्रेस बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित करने का कार्य स्वयं दानदाता ने अपने स्तर से किया है। दानदाता ने अपने स्तर से ज्वैलर्स से तांबे की प्लेटें तैयार करवाई गई और फिर उन पर सोने की परतें चढ़ाई गईं। दानदाता ने अपने ज्वैलर्स के माध्यम से ही इन प्लेटों को मंदिर में स्थापित कराया। सोना खरीदने से लेकर गर्भ ग्रह की दीवारों पर जड़ने तक का सम्पूर्ण कार्य कराया गया। मन्दिर समिति की इसमें कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। स्वर्ण व तांबे की प्लेटों के आधिकारिक बिल व बाउचर भी बीकेटीसी को कार्य पूर्ण होने के पश्चात दिए गए थे। उन्होंने कहा कि सच्चाई का पता लगाया जाएगा और कमेटी की जांच के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
